मिजोरम में 'साइलेंट किलर' का कहर: इस साल अब तक 19 मौतें; 40 वर्षों में 2,000 से अधिक लोगों ने गंवाई जान
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मिजोरम में 'साइलेंट किलर' का कहर: इस साल अब तक 19 मौतें; 40 वर्षों में 2,000 से अधिक लोगों ने गंवाई जान

12, 2, 2026

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आइजोल: मिजोरम आबकारी और मादक पदार्थ विभाग (Excise and Narcotics Department) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों (19 मार्च तक) में ही मादक पदार्थों के सेवन से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 17 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राज्य में नशे की समस्या कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है।

रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य:

  • ऐतिहासिक डेटा (1984-2026): मिजोरम में नशे से पहली मौत 1984 में दर्ज की गई थी। तब से अब तक कुल 2,016 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें 1,770 पुरुष और 246 महिलाएं शामिल हैं।

  • पिछले वर्ष का तुलनात्मक आंकड़ा: वर्ष 2025 में नशे के कारण कुल 118 लोगों की मौत हुई थी (औसतन हर महीने लगभग 10 मौतें)। 2026 के शुरुआती रुझान बताते हैं कि यह संकट अभी भी उसी रफ़्तार से बना हुआ है।

  • हेरोइन और 'कॉकटेल' का खतरा: अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि केवल हेरोइन ही नहीं, बल्कि इसे विभिन्न औषधीय दवाओं (Medicinal Drugs) के साथ मिलाकर लेना मौत का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। यह मिश्रण शरीर के अंगों को तुरंत विफल (Organ Failure) कर देता है।

  • युवाओं पर संकट: मरने वालों में एक बड़ी संख्या युवाओं की है, जो राज्य की जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति के लिए एक बड़ा खतरा है।

मिजोरम में नशे के खिलाफ संघर्ष:

राज्य सरकार और विभिन्न नागरिक समाज संगठन (जैसे YMA - Young Mizo Association) लगातार 'नशा मुक्त मिजोरम' के लिए अभियान चला रहे हैं। म्यांमार सीमा से होने वाली तस्करी को रोकना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।


निष्कर्ष:

1984 से शुरू हुआ यह सिलसिला आज 2,000 से अधिक मौतों तक पहुँच गया है। यह केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक संकट है जिसके लिए सख्त पुनर्वास (Rehabilitation) नीतियों और सीमा सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने की आवश्यकता है।

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