अरुणाचल प्रदेश में 'शिक्षा की शुद्धता' पर जोर: राज्यपाल परनाइक ने निजी संस्थानों में पारदर्शी प्रवेश और अनुसंधान मानकों की कड़ी निगरानी के दिए निर्देश
आज की ताजा खबर
LIVE

अरुणाचल प्रदेश में 'शिक्षा की शुद्धता' पर जोर: राज्यपाल परनाइक ने निजी संस्थानों में पारदर्शी प्रवेश और अनुसंधान मानकों की कड़ी निगरानी के दिए निर्देश

12, 2, 2026

3

image

ईटानगर: राजभवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान, राज्यपाल के. टी. परनाइक ने अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षणिक संस्थान नियामक आयोग (APPEIRC) के अध्यक्ष त्सेरिंग नकसांग और सदस्यों के साथ राज्य के निजी विश्वविद्यालयों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। राज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि कई संस्थान नियामक मानदंडों (Regulatory Norms) का पूर्ण अनुपालन नहीं कर रहे हैं।

राज्यपाल द्वारा दिए गए 5 प्रमुख 'सख्त' निर्देश:

  • पारदर्शी और योग्यता-आधारित प्रवेश: राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि सभी निजी संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट (Merit-based) पर आधारित होनी चाहिए। इसमें किसी भी तरह की धांधली या अपारदर्शिता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • UGC दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन: उन्होंने आयोग को निर्देश दिया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार कड़ा गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) लागू करे, ताकि शैक्षणिक विश्वसनीयता बनी रहे।

  • अनुसंधान और बुनियादी ढांचे की निगरानी: राज्यपाल ने कहा कि केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और शोध (Research) के मानकों की नियमित और कड़ी निगरानी होनी चाहिए।

  • नियमित समीक्षा और जवाबदेही: आयोग को केवल शिकायत मिलने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि संस्थानों के कामकाज की समय-समय पर खुद समीक्षा करनी चाहिए और कमी पाए जाने पर उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए।

  • लंबित मामलों का समाधान: आयोग के सदस्यों ने राज्यपाल को विभाग स्तर पर लंबित कई फाइलों और मुद्दों से अवगत कराया, जिस पर राज्यपाल ने त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया।

शिक्षा के क्षेत्र में इसका संभावित असर:

  1. डिग्री की वैल्यू बढ़ेगी: जब संस्थान अनुसंधान और गुणवत्ता पर ध्यान देंगे, तो वहां से निकलने वाले छात्रों की डिग्री की वैश्विक स्तर पर साख बढ़ेगी।

  2. छात्रों के हितों की रक्षा: पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया से योग्य छात्रों को निजी संस्थानों में सही अवसर मिल सकेंगे।

  3. बुनियादी ढांचे में सुधार: नियमित निगरानी के डर से संस्थान अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर (जैसे लैब, क्लासरूम) को बेहतर बनाने के लिए मजबूर होंगे।


निष्कर्ष:

राज्यपाल का यह कदम अरुणाचल प्रदेश को पूर्वोत्तर भारत के एक 'एजुकेशन हब' के रूप में विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। APPEIRC के लिए अब चुनौती यह है कि वह राज्यपाल के इन सख्त निर्देशों को कितनी तत्परता से लागू करता है।

Powered by Froala Editor