करगिल की 'दिल्ली दस्तक': गृह मंत्री अमित शाह से मिला लद्दाख का प्रतिनिधिमंडल; नागरिक हवाई अड्डे और 2 नए जिलों की मांग
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करगिल की 'दिल्ली दस्तक': गृह मंत्री अमित शाह से मिला लद्दाख का प्रतिनिधिमंडल; नागरिक हवाई अड्डे और 2 नए जिलों की मांग

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: करगिल के मुख्य कार्यकारी पार्षद (CEC) डॉ. मोहम्मद जफर अखून और सांसद मोहम्मद हनीफा जान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर करगिल की दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान मांगा। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब करगिल के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने का समय आ गया है।

प्रमुख मांगें और उनका रणनीतिक महत्व:

  • पूर्ण विकसित नागरिक हवाई अड्डा: वर्तमान में करगिल सर्दियों के दौरान (जोजीला दर्रा बंद होने पर) देश से कट जाता है। प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा हवाई पट्टी के विस्तार और नियमित नागरिक उड़ानों की मांग की है, ताकि आपातकालीन और सामान्य आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

  • 2 नए जिलों का गठन: सांकू (Sankoo) और शाकर-चिकतन (Shakar-Chiktan) को पूर्ण जिले का दर्जा देने पर जोर दिया गया है। तर्क यह है कि ये क्षेत्र आबादी और मानदंडों को पूरा करते हैं और इन्हें लद्दाख के आगामी नए जिलों की अधिसूचना में शामिल किया जाना चाहिए।

  • प्रशासनिक शक्तियों की बहाली: विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए एलएएचडीसी के उपायुक्त (DC) और सीईओ को ₹5 करोड़ तक के प्रशासनिक अनुमोदन और खर्च की शक्ति वापस देने की मांग की गई है, जिससे फाइलों का दिल्ली या लेह चक्कर नहीं काटना पड़ेगा।

  • स्वास्थ्य और शिक्षा का विस्तार: * करगिल के मौजूदा 100 बिस्तरों वाले अस्पताल को अपर्याप्त बताते हुए 200 बिस्तरों वाले आधुनिक अस्पताल की मांग की गई है।

    • स्वीकृत इंजीनियरिंग कॉलेज को जल्द शुरू करने और क्षेत्र के लिए एक समर्पित कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का आग्रह किया गया है।

गृह मंत्री का रुख:

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री ने करगिल के विकास के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई और प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा, विशेषकर कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।


निष्कर्ष:

करगिल नेतृत्व की यह पहल दर्शाती है कि लद्दाख स्वायत्त परिषद अब अपने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों के लिए अधिक मुखर हो रही है। यदि सांकू और शाकर-चिकतन को जिले का दर्जा मिलता है, तो यह करगिल के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक जीत होगी।

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