भुवनेश्वर में चुनावी ड्यूटी में लापरवाही पर गिरी गाज: स्कूल शिक्षिका निलंबित; बीएलओ के रूप में आदेशों की अवज्ञा का आरोप
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भुवनेश्वर में चुनावी ड्यूटी में लापरवाही पर गिरी गाज: स्कूल शिक्षिका निलंबित; बीएलओ के रूप में आदेशों की अवज्ञा का आरोप

12, 2, 2026

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भुवनेश्वर: भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) ने चंद्रशेखरपुर फेज-द्वितीय स्थित सरकारी उच्च विद्यालय की सहायक शिक्षिका रश्मि साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रश्मि साहू को बूथ स्तर अधिकारी (BLO) के रूप में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें वे विफल रहीं।

निलंबन के मुख्य कारण और वैधानिक आधार:

  • आदेशों की अवहेलना: अधिसूचना के अनुसार, शिक्षिका ने बिना किसी वैध कारण या पूर्व अनुमति के अपने निर्धारित कर्तव्यों का पालन नहीं किया। प्रशासन ने इसे "घोर लापरवाही और कर्तव्य की अवहेलना" करार दिया है।

  • SIR प्रक्रिया का महत्व: ओडिशा में 1 अप्रैल, 2026 से मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम शुरू होना है। बीएलओ की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि उन्हें घर-घर जाकर डेटा सत्यापित करना होता है।

  • कानूनी कार्रवाई: जिला निर्वाचन अधिकारी-सह-आयुक्त (बीएमसी) चंचल राणा ने यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32(1) के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए की है।

  • कदाचार (Misconduct): चुनावी ड्यूटी से इनकार करना या उसमें ढिलाई बरतना केवल सेवा नियमों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि एक दंडनीय अपराध भी माना जाता है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32(1): एक नज़र में

"यदि कोई व्यक्ति, जिसे निर्वाचक नामावलियों की तैयारी या संशोधन के संबंध में कोई आधिकारिक कर्तव्य सौंपा गया है, बिना उचित कारण के ऐसे कर्तव्य के उल्लंघन में किसी कार्य या चूक का दोषी है, तो वह कारावास या जुर्माने से दंडनीय होगा।"


निष्कर्ष:

यह मामला अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि चुनाव आयोग के निर्देशों को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। ओडिशा में निष्पक्ष और सटीक चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अब 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपना रहा है।

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