विदेश नीति पर 'महायुद्ध': भाजपा ने राहुल गांधी को बताया 'अपरिपक्व'; शशि थरूर और मनीष तिवारी की दी मिसाल
आज की ताजा खबर
LIVE

विदेश नीति पर 'महायुद्ध': भाजपा ने राहुल गांधी को बताया 'अपरिपक्व'; शशि थरूर और मनीष तिवारी की दी मिसाल

12, 2, 2026

2

image

नयी दिल्ली: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर राहुल गांधी द्वारा सरकार की आलोचना किए जाने के बाद भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अंतरराष्ट्रीय संकट का उपयोग घरेलू राजनीति चमकाने के लिए कर रहे हैं, जबकि उनकी पार्टी के अनुभवी सहयोगी सरकार के "संतुलित और रणनीतिक" रुख का समर्थन कर रहे हैं।

भाजपा के हमले के 3 बड़े आधार:

  1. पार्टी के भीतर विरोधाभास: भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और शहजाद पूनावाला ने दावा किया कि शशि थरूर और मनीष तिवारी ने वैश्विक जटिलताओं को समझते हुए एक जिम्मेदार रुख अपनाया है। पूनावाला ने कहा, "कांग्रेस के दिग्गजों ने ही राहुल गांधी को आईना दिखा दिया है।"

  2. 'नैतिक आत्मसमर्पण' बनाम 'जिम्मेदार कूटनीति': भाजपा ने शशि थरूर के एक हालिया लेख का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने भारत की चुप्पी को 'नैतिक हार' के बजाय 'जिम्मेदार राजनयिक नेतृत्व' बताया है। भाजपा का तर्क है कि राहुल गांधी इस बारीकी को समझने में विफल रहे हैं।

  3. रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चाहते हैं कि भारत इस युद्ध में किसी एक पक्ष का चुनाव करे, जबकि भारत के दीर्घकालिक हित "सबके साथ संवाद" और "स्वतंत्र विदेश नीति" में निहित हैं।

शशि थरूर का संतुलित रुख और सुझाव:

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 'पीटीआई-भाषा' को दिए साक्षात्कार में सरकार के प्रति नरम लेकिन सुधारात्मक रुख अपनाया:

  • समर्थन: उन्होंने कहा कि वे सरकार की 'सतर्कता' को समझते हैं।

  • सुझाव: थरूर ने उम्मीद जताई कि भारत सरकार दोनों पक्षों से युद्ध खत्म करने की सार्वजनिक अपील करेगी।

  • ईरान पर कूटनीतिक चूक: थरूर ने आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर भारत को तुरंत आधिकारिक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी, जैसा कि 2024 में राष्ट्रपति रईसी के समय किया गया था।


निष्कर्ष:

यह विवाद दर्शाता है कि राष्ट्रहित और विदेश नीति के मुद्दों पर भी भारतीय राजनीति दो ध्रुवों में बंटी हुई है। जहां भाजपा इसे 'राष्ट्र प्रथम' बनाम 'राजनीति प्रथम' की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष का एक धड़ा (विशेषकर राहुल गांधी) सरकार की चुप्पी को भारत के नैतिक रसूख में कमी के रूप में देख रहा है।

Powered by Froala Editor