आधार सुधार में देरी पर CIC सख्त: UIDAI को समयसीमा (Deadline) तय करने के निर्देश; "नागरिकों को RTI की जरूरत न पड़े, ऐसा तंत्र बनाएं"
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आधार सुधार में देरी पर CIC सख्त: UIDAI को समयसीमा (Deadline) तय करने के निर्देश; "नागरिकों को RTI की जरूरत न पड़े, ऐसा तंत्र बनाएं"

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग ने एक महिला की अपील पर सुनवाई करते हुए UIDAI की कार्यप्रणाली पर गहरी चिंता जताई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जन्मतिथि, नाम या लिंग जैसे सुधारों के लिए नागरिकों को अदालतों या RTI (सूचना का अधिकार) का सहारा लेना पड़ना एक विफल प्रशासनिक ढांचे का संकेत है।

सुनवाई के मुख्य बिंदु और CIC की टिप्पणियां:

  • मामला क्या था? एक महिला ने अपनी जन्मतिथि में सुधार के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। परेशान होकर उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करनी पड़ी और बाद में RTI के जरिए जवाब मांगना पड़ा।

  • RTI बनाम शिकायत निवारण: UIDAI ने दलील दी कि महिला का आवेदन "सूचना मांगने" के बजाय "शिकायत" जैसा था। इस पर CIC ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर आपका शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal) मजबूत होता, तो नागरिक को RTI लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

  • पारदर्शिता और स्पष्टता: आयोग ने पाया कि अक्सर लोग वर्तनी की गलतियों और जनसांख्यिकीय विवरणों (Demographic details) में सुधार के लिए भटकते रहते हैं। इसके लिए एक पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल (User-friendly) प्रक्रिया की तत्काल आवश्यकता है।

  • समयबद्ध निपटान: CIC ने UIDAI को निर्देश दिया है कि आधार सुधार के हर अनुरोध के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की जाए, ताकि आवेदक को पता हो कि उसका काम कितने दिनों में पूरा होगा।

UIDAI की सफाई:

सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने सूचित किया कि अपीलकर्ता की जन्मतिथि अब सही कर दी गई है। हालांकि, आयोग ने इसे केवल एक मामले का समाधान न मानकर पूरी प्रणालीगत सुधार (Systemic Reform) पर जोर दिया है।


निष्कर्ष और नागरिकों पर प्रभाव:

  1. जवाबदेही बढ़ेगी: समयसीमा तय होने से आधार केंद्रों और ऑनलाइन पोर्टल पर लंबित आवेदनों की संख्या कम होगी।

  2. कानूनी बोझ में कमी: जब विभाग के भीतर ही शिकायतें हल होंगी, तो अदालतों में छोटे-छोटे सुधारों के लिए जाने वाले मामलों की संख्या घटेगी।

  3. जनता का भरोसा: आधार आज लगभग हर सरकारी योजना के लिए अनिवार्य है; ऐसे में इसमें सुधार की प्रक्रिया का सरल होना जनता के विश्वास को मजबूत करेगा।

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