बैंकिंग और डिजिटल इंडिया रिपोर्ट: डिफॉल्टर्स पर ₹40,000 करोड़ का बकाया और UPI की 81% हिस्सेदारी
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बैंकिंग और डिजिटल इंडिया रिपोर्ट: डिफॉल्टर्स पर ₹40,000 करोड़ का बकाया और UPI की 81% हिस्सेदारी

12, 2, 2026

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहाँ 'विलफुल डिफॉल्टर्स' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है, वहीं डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का उपयोग किया जा रहा है।

1. शीर्ष 10 'विलफुल डिफॉल्टर्स' (31 मार्च 2025 तक)

उन इकाइयों की सूची जिन्होंने सक्षम होने के बावजूद बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया:

स्थानइकाई/कंपनी का नामबकाया राशि (₹ करोड़)
1एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड6,695
2गीतांजलि जेम्स6,236
3बीटा नेफ्थोल5,268
4राकेशकुमार कुलदीपसिंह वधावन4,291
5भूषण पावर एंड स्टील (पूर्व निदेशक)3,810
6रजा टेक्सटाइल्स3,260
7गिल्ट पैक3,080
8रैंक इंडस्ट्रीज2,655
9HDIL (हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर)2,540

आरबीआई का निर्देश: बैंकों को इन चूककर्ताओं की सूची हर महीने क्रेडिट सूचना कंपनियों (CICs) को सौंपनी होगी ताकि इसे सार्वजनिक किया जा सके।


2. डिजिटल भुगतान: भारत की वैश्विक सफलता

डिजिटल लेन-देन में पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है:

  • लेन-देन की मात्रा: खुदरा डिजिटल भुगतान वित्त वर्ष 2022 के ₹457.44 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹849.12 लाख करोड़ हो गया है।

  • UPI का दबदबा: कुल खुदरा डिजिटल भुगतान में 81% हिस्सा अकेले UPI का है। भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी रीयल-टाइम खुदरा भुगतान प्रणाली संचालित कर रहा है।


3. सुरक्षा और धोखाधड़ी की निगरानी (AI आधारित)

बढ़ते डिजिटल लेन-देन के साथ धोखाधड़ी से निपटने के लिए सरकार ने कई तकनीकी सुरक्षा चक्र तैयार किए हैं:

  • धोखाधड़ी निगरानी (Fraud Monitoring): एनपीसीआई (NPCI) बैंकों को AI/Machine Learning आधारित समाधान प्रदान करता है, जो संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर उन्हें तुरंत 'अस्वीकार' कर देते हैं।

  • डिवाइस बाइंडिंग: सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्राहक के मोबाइल नंबर और उपकरण (Device) को लिंक किया गया है।

  • सुरक्षा उपाय: दैनिक लेनदेन सीमा (Daily Limit), पिन-आधारित प्रमाणीकरण और विशिष्ट उपयोगों पर प्रतिबंध जैसे सुरक्षा फीचर्स लागू किए गए हैं।

  • जागरूकता: आरबीआई और बैंक एसएमएस और रेडियो के माध्यम से साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अभियान चला रहे हैं।


निष्कर्ष:

वित्त मंत्री की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि जहाँ एक तरफ सरकार बड़े कर्जदारों से वसूली के लिए पारदर्शिता और सख्त निगरानी का उपयोग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों के लिए बैंकिंग को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का विस्तार कर रही है। ₹849 लाख करोड़ का डिजिटल लेन-देन भारत की आर्थिक प्रगति का एक बड़ा सूचक है।

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