जंतर-मंतर पर 'संसद घेराव': भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ युवा कांग्रेस का हल्लाबोल; 90 कार्यकर्ता हिरासत में
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जंतर-मंतर पर 'संसद घेराव': भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ युवा कांग्रेस का हल्लाबोल; 90 कार्यकर्ता हिरासत में

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में सोमवार को सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं—सचिन पायलट, रणदीप सुरजेवाला और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग—ने भी कार्यकर्ताओं में जोश भरा और इस व्यापार समझौते को भारतीय हितों के खिलाफ बताया।

युवा कांग्रेस के 3 मुख्य आरोप और मांगें:

  1. किसानों और छोटे व्यवसायों को खतरा: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस अंतरिम समझौते से अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खुल जाएंगे, जिससे स्थानीय किसानों, श्रमिकों और लघु उद्योगों (MSMEs) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

  2. 'एप्सटीन फाइल' और दबाव का आरोप: उदय भानु चिब ने एक बेहद गंभीर और विवादास्पद आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में है। उन्होंने 'एप्सटीन फाइल' (Epstein Files) का जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री ने समझौता कर लिया है, जिसके चलते देश के आर्थिक हितों की अनदेखी की जा रही है।

  3. समझौता रद्द करने की मांग: कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि सरकार इस "एकतरफा" प्रतीत होने वाले व्यापार समझौते को तुरंत रद्द करे।

पुलिस कार्रवाई और 'CNG' वाला नाटकीय मोड़:

  • हिरासत: मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। लगभग 90 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

  • अजीबोगरीब दावा: हिरासत में लिए गए सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें ले जा रही पुलिस बस की CNG बीच रास्ते में खत्म हो गई, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें आधे रास्ते में ही छोड़ दिया। हालांकि, पुलिस ने इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि सभी को जल्द रिहा कर दिया जाएगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का रुख:

  • सचिन पायलट और सुरजेवाला: नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक संप्रभुता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता की कमी के साथ गुपचुप तरीके से बड़े देशों के साथ डील्स कर रही है।


निष्कर्ष:

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध हमेशा से संवेदनशील रहे हैं। जहाँ सरकार इसे भारतीय निर्यात के लिए नए अवसर के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष इसे घरेलू बाजार के लिए खतरा मान रहा है। 'एप्सटीन फाइल्स' जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को इस प्रदर्शन से जोड़ना दर्शाता है कि विपक्ष इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने की तैयारी में है।

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