कर्नाटक में ज़मीन का संकट: "अंतिम संस्कार के लिए ज़मीन खरीद रही है सरकार"; राजस्व मंत्री ने विधानसभा में जताई चिंता
आज की ताजा खबर
LIVE

कर्नाटक में ज़मीन का संकट: "अंतिम संस्कार के लिए ज़मीन खरीद रही है सरकार"; राजस्व मंत्री ने विधानसभा में जताई चिंता

12, 2, 2026

11

image

बेंगलुरु: कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्वीकार किया कि राज्य के कई हिस्सों, विशेषकर शहरी और विकसित ग्रामीण इलाकों में, कब्रिस्तानों (Burial Grounds) के लिए सरकारी ज़मीन पूरी तरह खत्म हो चुकी है। यह मुद्दा न केवल प्रशासनिक है, बल्कि अब सामाजिक और धार्मिक तनाव का कारण भी बनता जा रहा है।

विधानसभा में चर्चा के मुख्य बिंदु:

  • भारी वित्तीय बोझ: मंत्री ने बताया कि पिछले 3 वर्षों में सरकार को केवल कब्रिस्तानों के लिए ज़मीन अधिग्रहित करने हेतु ₹58 करोड़ खर्च करने पड़े हैं।

  • अल्पसंख्यक समुदायों की नाराज़गी: मुस्लिम और ईसाई समुदायों में शवों को दफनाने की अनिवार्य परंपरा है। मंत्री के अनुसार, इन समुदायों में पर्याप्त जगह न मिल पाने के कारण सरकार के प्रति भारी रोष है। उन्होंने कहा, "जब हम कहते हैं कि ज़मीन नहीं है, तो कोई हमारी मजबूरी नहीं समझता।"

  • बदलता सामाजिक व्यवहार: बेंगलुरु और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले हिंदू समुदाय के वे लोग, जो पहले शवों को दफनाते थे, अब जगह की कमी के कारण दाह संस्कार (Cremation) की ओर रुख कर रहे हैं।

  • दान और कमी: सरकार ने पिछले दशकों में स्कूलों, खेल के मैदानों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए काफी ज़मीनें आवंटित या दान की हैं। अब स्थिति यह है कि नए स्कूलों या श्मशान घाटों के लिए प्रशासन को "भीख मांगकर" ज़मीन की गुहार लगानी पड़ रही है।

  • न्यायालय का रुख: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी सरकार को निर्देश दिया है कि हर गांव और कस्बे में सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया जाए, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।

ज़मीन की कमी के 3 प्रमुख कारण:

  1. शहरीकरण: कृषि और सरकारी ज़मीनों का तेज़ी से आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में परिवर्तन।

  2. अतिक्रमण: कई सरकारी भूखंडों पर अवैध कब्जों के कारण वास्तविक विकास कार्यों के लिए जगह का अभाव।

  3. बढ़ती आबादी: मृत्यु दर और जनसंख्या घनत्व के अनुपात में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का विस्तार न हो पाना।


निष्कर्ष:

राजस्व मंत्री का यह बयान एक बड़े शहरी नियोजन (Urban Planning) संकट की चेतावनी है। सरकार अब स्कूलों, अस्पतालों और कब्रिस्तानों जैसी अनिवार्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए ज़मीन आरक्षित करने की नई नीति पर काम कर रही है, लेकिन निजी ज़मीनों की आसमान छूती कीमतों के कारण यह एक बड़ी वित्तीय चुनौती बनी रहेगी।

Powered by Froala Editor