देवेगौड़ा का सोनिया गांधी को पत्र: "विपक्ष के आचरण ने संसदीय लोकतंत्र के मेरे मूल विचार पर हमला किया है"
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देवेगौड़ा का सोनिया गांधी को पत्र: "विपक्ष के आचरण ने संसदीय लोकतंत्र के मेरे मूल विचार पर हमला किया है"

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (16 मार्च 2026): देवेगौड़ा ने अपने पत्र में विशेष रूप से कांग्रेस सांसदों और विपक्ष के नेता (LoP) द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के "तरीके" को निशाने पर लिया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव के लिए खतरा बताया है।

पत्र की 5 प्रमुख बातें:

  1. अराजकता और व्यवधान: देवेगौड़ा ने लिखा कि वे संसद के अंदर और परिसर में फैलाई गई "अराजकता" से बहुत परेशान हैं। उन्होंने कहा कि नारेबाजी, तख्तियां दिखाना और नाम लेकर पुकारना (Name-calling) अब चर्चा से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

  2. "चाय-पकौड़े वाली सभा": उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर विपक्ष के धरने की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शन का स्वरूप ऐसा हो गया है जैसे कोई "चाय की दुकान की सभा" हो, जहाँ सीढ़ियों पर बैठकर चाय, बिस्कुट और पकौड़े मंगवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी विरोध होते थे, लेकिन कभी संसद के प्रवेश द्वार को इस तरह बाधित नहीं किया गया।

  3. संस्थापक नेताओं का हवाला: उन्होंने नेहरू, पटेल, आंबेडकर और आजाद जैसे नेताओं के मार्गदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके 65 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी ऐसी "लापरवाही" (Casualness) नहीं देखी। उन्होंने गर्व से कहा कि "अत्यधिक उकसावे" के बावजूद उन्होंने कभी सदन के वेल (Well) में प्रवेश नहीं किया।

  4. सोनिया गांधी से अपील: देवेगौड़ा ने सोनिया गांधी की वरिष्ठता और उनके "अनुग्रह व परिपक्वता" का हवाला देते हुए उनसे हस्तक्षेप करने को कहा। उन्होंने आग्रह किया कि वे अपनी पार्टी के नेताओं को समझाएं कि वे इस तरह के व्यवहार से "अपना राजनीतिक भविष्य और अपना उद्देश्य" न बिगाड़ें।

  5. लोकतंत्र की नींव: उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की "नकारात्मक ऊर्जा" लोकतंत्र की नींव को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकती है और समाज में कड़वाहट छोड़ सकती है।

सोनिया गांधी का जवाब:

सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी ने इस पत्र पर तीन लाइनों का संक्षिप्त जवाब दिया है। उन्होंने देवेगौड़ा की टिप्पणियों को 'नोट' (ध्यान में रखना) करने की बात कही और साथ ही उन्हें उगादी (Ugadi) पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।


निष्कर्ष:

देवेगौड़ा का यह पत्र एक ऐसे समय में आया है जब संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच खाई बहुत गहरी हो गई है। एक पूर्व प्रधानमंत्री की यह सलाह कि "विरोध उतना ही करें जिससे बनाई गई व्यवस्था न टूटे", संसदीय गरिमा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक गंभीर अपील मानी जा रही है।

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