गांधीनगर रक्षा सम्मेलन: "नवाचार का वैश्विक केंद्र बना भारत"; राजनाथ सिंह ने 24 देशों के प्रतिनिधियों के सामने रखा 'आत्मनिर्भरता' का विजन
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गांधीनगर रक्षा सम्मेलन: "नवाचार का वैश्विक केंद्र बना भारत"; राजनाथ सिंह ने 24 देशों के प्रतिनिधियों के सामने रखा 'आत्मनिर्भरता' का विजन

12, 2, 2026

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गांधीनगर (गुजरात): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत का रक्षा ईकोसिस्टम अब अगली पीढ़ी की तकनीक (Next-Gen Tech) पर केंद्रित है। उन्होंने 'विश्व मित्र' की अवधारणा को दोहराते हुए कहा कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शांति के लिए भी तकनीक साझा करने को तैयार है।

रक्षा मंत्री के संबोधन के 5 मुख्य स्तंभ:

  1. नवाचार का केंद्र (Hub of Innovation): पिछले एक दशक में भारत ने आयात पर निर्भरता कम कर स्वदेशी डिजाइन और विकास पर जोर दिया है। अब भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मानवरहित प्रणालियों (Drones) और अंतरिक्ष रक्षा जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर रहा है।

  2. हाइब्रिड खतरों से मुकाबला: सिंह ने रेखांकित किया कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं; साइबर और हाइब्रिड खतरे अब बड़ी चुनौती हैं। इनसे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान साझा करना अनिवार्य है।

  3. साझेदारी और सह-विकास: भारत अब केवल 'खरीदार-विक्रेता' संबंध में विश्वास नहीं रखता, बल्कि संयुक्त विकास (Co-development) और सह-उत्पादन (Co-production) के माध्यम से 'भरोसेमंद साझेदार' बनने की दिशा में अग्रसर है।

  4. रक्षा अताशे (Defense Attaches) की भूमिका: उन्होंने 24 देशों से आए प्रतिनिधियों को बताया कि वे सैन्य, सरकार और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतु हैं, जो वैश्विक सुरक्षा सहयोग की नींव रखते हैं।

  5. विश्व मित्र की आकांक्षा: प्रधानमंत्री मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के लिए एक 'विश्व मित्र' के रूप में उभरना चाहता है, जो शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।

सम्मेलन का महत्व और भागीदारी:

  • विषय: "वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी परिदृश्य में आत्मनिर्भर भारत: नवाचार, निर्यात और संयुक्त प्रौद्योगिकी साझेदारी को गति देना।"

  • भागीदारी: अफ्रीका, एशिया, प्रशांत और कैरेबियन क्षेत्र के 24 देशों के राजनयिक और रक्षा प्रतिनिधि शामिल हुए।

  • लक्ष्य: भारतीय रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना और मित्र देशों के साथ तकनीकी गठजोड़ मजबूत करना।


निष्कर्ष:

राजनाथ सिंह का यह संबोधन दर्शाता है कि भारत अब रक्षा तकनीक के मामले में दुनिया के पीछे चलने के बजाय नेतृत्व करने की तैयारी कर चुका है। गांधीनगर का यह सम्मेलन भविष्य में भारत के रक्षा निर्यात (Defense Export) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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