महिला आरक्षण: खरगे की प्रधानमंत्री मोदी से मांग; "क्रियान्वयन की रूपरेखा पर जल्द बुलाएं सर्वदलीय बैठक"
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महिला आरक्षण: खरगे की प्रधानमंत्री मोदी से मांग; "क्रियान्वयन की रूपरेखा पर जल्द बुलाएं सर्वदलीय बैठक"

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (17 मार्च 2026): कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को स्पष्ट किया है कि 33% महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव पर चर्चा केवल चुनिंदा नेताओं के साथ नहीं, बल्कि सभी विपक्षी दलों की मौजूदगी में होनी चाहिए।

खरगे के पत्र के मुख्य बिंदु:

  • सर्वदलीय परामर्श: खरगे ने रीजीजू को लिखे पत्र में कहा कि सरकार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने इसे "संसदीय लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपरा" बताया।

  • समय सीमा पर सवाल: उन्होंने याद दिलाया कि यह अधिनियम सितंबर 2023 में पारित हुआ था। अब 30 महीने बाद सरकार इसके तौर-तरीकों पर चर्चा करना चाहती है, जबकि मूल कानून में इसे 'जनगणना और परिसीमन' से जोड़ दिया गया था।

  • कांग्रेस का रुख: कांग्रेस (और विशेष रूप से जयराम रमेश) का मानना है कि इस पर व्यापक विमर्श जरूरी है, क्योंकि इसमें 'कोटा के भीतर कोटा' (OBC आरक्षण) और लागू करने की समयसीमा जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।


क्या सरकार कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है?

सूत्रों के अनुसार, सरकार जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की प्रतीक्षा किए बिना ही महिला आरक्षण लागू करने के कानूनी रास्तों की तलाश कर रही है।

  • संवैधानिक पेच: वर्तमान कानून (106वां संशोधन) के अनुसार, आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब अगली जनगणना के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन पूरा हो जाएगा।

  • नया संशोधन: यदि सरकार परिसीमन से पहले इसे लागू करना चाहती है, तो उसे संसद में एक और संविधान संशोधन विधेयक लाना होगा।

  • संभावित रणनीति: सरकार संभवतः 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे हकीकत बनाने के लिए विपक्ष का सहयोग चाहती है, ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके।


नारी शक्ति वंदन अधिनियम: एक नज़र में

विवरणस्थिति
आरक्षण प्रतिशतलोकसभा और विधानसभाओं में 33% (एक-तिहाई) सीटें
पारित होने की तिथिसितंबर 2023 (संसद के विशेष सत्र में)
वर्तमान बाधाजनगणना और परिसीमन प्रक्रिया का पूरा न होना
विपक्ष की मांगतत्काल क्रियान्वयन और OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा

निष्कर्ष:

महिला आरक्षण का मुद्दा अब 'श्रेय लेने' की राजनीति और 'कानूनी जटिलताओं' के बीच फंसता दिख रहा है। यदि प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठक बुलाते हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्षी दल परिसीमन के बिना आरक्षण लागू करने के सरकार के संभावित प्रस्ताव का समर्थन करेंगे।

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