लोकसभा अपडेट: "भाषण नहीं, संक्षिप्त जवाब दें मंत्री"; अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल की दक्षता पर दिया जोर
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लोकसभा अपडेट: "भाषण नहीं, संक्षिप्त जवाब दें मंत्री"; अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल की दक्षता पर दिया जोर

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (17 मार्च 2026): मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने मंत्रियों और सदस्यों, दोनों को ही 'टू द पॉइंट' रहने की नसीहत दी। उनका मुख्य उद्देश्य प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्नों को शामिल करना है।

घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:

  • मंत्री को टोकना: जब सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, तेदेपा सदस्य जी.एम. हरीश बालयोगी के सवाल का जवाब दे रहे थे, तो अध्यक्ष ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा— "आप भाषण क्यों दे रहे हैं? आप तो जवाब दो।"

  • संसदीय परंपरा का आग्रह: बिरला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे बार-बार मंत्रियों से संक्षिप्त उत्तर देने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन फिर भी जवाब विस्तृत हो जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया— "जितना सदस्य पूछें, उतना ही जवाब दें।"

  • समय प्रबंधन (Time Management): अध्यक्ष ने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी लेते हुए एक सदस्य को अंतिम प्रश्न पूछने को कहा— "समय कम है, मंत्रीजी को लंबा जवाब देना है।"


प्रश्नकाल (Question Hour) का महत्व और नियम

संसद के प्रत्येक सत्र का पहला घंटा (आमतौर पर 11:00 से 12:00 बजे तक) प्रश्नकाल होता है, जिसके अपने विशिष्ट नियम हैं:

पहलूविवरण
उद्देश्यलोक महत्व के मुद्दों पर मंत्रियों से जानकारी मांगना और सरकार को जवाबदेह बनाना।
प्रश्नों के प्रकारतारांकित (Starred), अतारांकित (Unstarred) और अल्प सूचना प्रश्न।
अध्यक्ष की चुनौतीसीमित समय (60 मिनट) में 20 सूचीबद्ध तारांकित प्रश्नों और उनके पूरक प्रश्नों को निपटाना।

निष्कर्ष:

अध्यक्ष ओम बिरला का यह रुख दर्शाता है कि वे सदन के समय के सदुपयोग को लेकर गंभीर हैं। लंबे जवाब अक्सर अन्य सदस्यों के प्रश्नों के समय को कम कर देते हैं, जिससे जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनछुए रह जाते हैं। संक्षिप्त और सटीक संवाद न केवल समय बचाता है, बल्कि संसदीय बहस के स्तर को भी ऊँचा उठाता है।

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