होर्मुज जलडमरूमध्य से मुंद्रा तक का जांबाज सफर: जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी सुरक्षित लौटे, परिवार ने ली राहत की सांस
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होर्मुज जलडमरूमध्य से मुंद्रा तक का जांबाज सफर: जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी सुरक्षित लौटे, परिवार ने ली राहत की सांस

12, 2, 2026

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जमशेदपुर: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और युद्ध की आहट के बीच, रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर भारतीय एलपीजी पोत ‘शिवालिक’ गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुँच गया है। इस चुनौतीपूर्ण मिशन का हिस्सा रहे जमशेदपुर के लाल, सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी के घर लौटने की खबर से उनके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू हैं।

मिशन 'शिवालिक' और कूटनीतिक जीत:

  • रणनीतिक मार्ग: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में से एक बना हुआ है। भारत सरकार और ईरानी अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ही ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे पोतों को सुरक्षित रास्ता मिल सका।

  • अंश की भूमिका: बीआईटी (BIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और कोच्चि से मरीन इंजीनियरिंग करने वाले अंश त्रिपाठी इस जहाज पर तकनीकी संचालन की कमान संभाल रहे थे। उनके पिता, मिथिलेश त्रिपाठी (पूर्व वायु सेना फ्लाइट इंजीनियर), ने बताया कि मुख्यालय से हरी झंडी मिलने तक जहाज को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे।

परिजनों की बेचैनी और दुआएं:

अंश के पिता ने भावुक होते हुए बताया कि कतर से रवाना होने के बाद पिछले 4-5 दिनों से संपर्क केवल व्हाट्सएप कॉल तक सीमित था। पश्चिम एशिया में युद्ध की खबरों ने परिवार को टीवी स्क्रीन से चिपके रहने पर मजबूर कर दिया था। जमशेदपुर के परडीह इलाके में रहने वाले इस परिवार के लिए ‘शिवालिक’ का मुंद्रा तट पर पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

आपूर्ति की सुरक्षा:

अधिकारियों के अनुसार, ‘शिवालिक’ अपने साथ 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आया है, जिसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने मंगाया था। वहीं, दूसरा जहाज ‘नंदा देवी’ भी जल्द ही कांडला बंदरगाह पहुँचने वाला है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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