राज्यसभा में उठी छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग: 'लोकतंत्र की नर्सरी' बंद होने पर सपा सांसद ने जताई चिंता
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राज्यसभा में उठी छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग: 'लोकतंत्र की नर्सरी' बंद होने पर सपा सांसद ने जताई चिंता

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: देश के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों (Student Union Elections) को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग अब संसद के उच्च सदन तक पहुँच गई है। मंगलवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्र राजनीति का अभाव देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहा है।

प्रमुख बिंदु: 'नर्सरी' से 'लेटरल एंट्री' तक का सफर

  • लोकतंत्र की प्राथमिक इकाई: जावेद अली खान ने तर्क दिया कि छात्र संघ चुनाव संसदीय प्रणाली की प्राथमिक इकाई हैं। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि कैसे छात्र राजनीति ने देश में बड़े राजनीतिक बदलावों की नींव रखी थी।

  • बढ़ती संख्या, घटते चुनाव: सांसद ने आंकड़ों के साथ चिंता जताई कि पहले विश्वविद्यालयों की संख्या कम थी लेकिन चुनाव नियमित होते थे। आज देश में 1,000 से अधिक विश्वविद्यालय हैं, मगर केवल 10-15 में ही छात्र संघ के चुनाव हो रहे हैं।

  • बाहुबल बनाम परिपक्वता: उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि छात्र राजनीति की नर्सरी बंद होने के कारण अब राजनीति में बाहुबल, धन बल और पूर्व नौकरशाहों की 'लेटरल एंट्री' का बोलबाला बढ़ गया है। छात्र राजनीति से निकले नेता अधिक परिपक्व और जमीनी मुद्दों से जुड़े होते हैं।

संसद में उठाई गई मांग:

सपा सांसद ने सरकार से मांग की है कि छात्र नेताओं को तैयार करने और युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए देश के सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनाव नियमित रूप से कराए जाने चाहिए।

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