दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख: केंद्रीय मंत्री की बेटी को 'एप्स्टीन' से जोड़ने वाली सामग्री 24 घंटे में हटाने का आदेश
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दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख: केंद्रीय मंत्री की बेटी को 'एप्स्टीन' से जोड़ने वाली सामग्री 24 घंटे में हटाने का आदेश

12, 2, 2026

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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी, हिमायनी पुरी के खिलाफ चलाए जा रहे 'दुर्भावनापूर्ण' ऑनलाइन अभियान पर रोक लगा दी है। अदालत ने सभी सोशल मीडिया मंचों को निर्देश दिया है कि दोषी अमेरिकी अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से उन्हें जोड़ने वाली किसी भी सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटा दिया जाए।

अदालत की कार्यवाही के मुख्य बिंदु:

  • न्यायाधीश का निर्देश: न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित उपयोगकर्ता स्वयं इन पोस्टों को नहीं हटाते हैं, तो 'X' (ट्विटर), फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को ऐसी सामग्री तक पहुंच को ब्लॉक (अवरुद्ध) करना होगा।

  • अपूरणीय क्षति का तर्क: अदालत ने माना कि हिमायनी पुरी एक प्रतिष्ठित वित्त पेशेवर हैं और इस तरह के आधारहीन आरोपों से उनकी "वैश्विक प्रतिष्ठा" को अपूरणीय क्षति हो रही है।

  • 10 करोड़ का मानहानि दावा: हिमायनी पुरी ने अपने मुकदमे में आरोपियों से बिना शर्त माफी और 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। उन्होंने दलील दी कि उन्हें केवल उनके पिता के राजनीतिक कद के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

क्या है विवाद?

फरवरी 2026 से सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट प्रसारित किए जा रहे थे, जिनमें दावा किया गया था कि हिमायनी पुरी के जेफ्री एप्स्टीन (अमेरिकी यौन अपराधी जिसकी 2019 में मौत हो गई) के साथ वित्तीय या व्यक्तिगत संबंध थे। वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत में इन दावों को "पूरी तरह से झूठा, बेबुनियाद और समन्वित दुष्प्रचार" करार दिया।

अगली सुनवाई:

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त में तय की है, तब तक किसी भी नए अपमानजनक पोस्ट को प्रकाशित करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

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