राज्यसभा में गूँजी डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग: 'भगवान' कहे जाने वाले चिकित्सकों पर हमले चिंताजनक, सांसद ने की 'सुरक्षा समिति' बनाने की अपील
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राज्यसभा में गूँजी डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग: 'भगवान' कहे जाने वाले चिकित्सकों पर हमले चिंताजनक, सांसद ने की 'सुरक्षा समिति' बनाने की अपील

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: देश के विभिन्न राज्यों में डॉक्टरों पर हो रहे लगातार हमलों और उनके साथ होने वाली हिंसा का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गरमाया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के माहौल को जटिल होने से बचाने के लिए डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास बहाली अत्यंत आवश्यक है।

चौंकाने वाले आंकड़े और हकीकत:

  • हिंसा का शिकार: डॉ. बाजपेयी ने एक राष्ट्रीय अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि 7.9% डॉक्टरों ने किसी न किसी तरह की हिंसा का सामना किया है, जबकि 3.9% मामलों में उन पर शारीरिक हमले हुए।

  • दिल्ली की स्थिति: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा की स्थिति गंभीर है। आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच हमलों के 149 मामले सामने आए, जिनमें अकेले 2024 में 49 और 2025 में 48 घटनाएं हुईं।

  • पुलिस से दूरी: सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 48% घटनाओं में एफआईआर (FIR) तक दर्ज नहीं कराई गई, क्योंकि डॉक्टरों का प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र से भरोसा उठ रहा है।

सांसद द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण समाधान:

डॉ. बाजपेयी ने केवल समस्या ही नहीं उठाई, बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक त्रिस्तरीय मॉडल का सुझाव भी दिया:

  1. जिला स्तर पर समिति: प्रत्येक जिले में 'मरीज-डॉक्टर सुरक्षा समिति' का गठन किया जाए।

  2. अपीलीय व्यवस्था: राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र निकाय हो।

  3. मुआवजा और न्याय: पीड़ित डॉक्टरों को उचित मुआवजा दिया जाए और प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाए ताकि वे बिना किसी डर के सेवा दे सकें।

"जब डॉक्टर डरा हुआ होगा, तो इलाज प्रभावित होगा। हमें डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच बढ़ती कटुता को खत्म कर सुरक्षात्मक वातावरण बनाना होगा।" — डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, सांसद

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