लोकसभा में गूँजी बुजुर्गों की पीड़ा: '70 साल के बुजुर्गों को ऊपर की बर्थ और युवाओं को नीचे की सीट क्यों?', TMC सांसद का रेलवे पर वार
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लोकसभा में गूँजी बुजुर्गों की पीड़ा: '70 साल के बुजुर्गों को ऊपर की बर्थ और युवाओं को नीचे की सीट क्यों?', TMC सांसद का रेलवे पर वार

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: भारतीय रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं और लोअर बर्थ (नीचे की सीट) के आवंटन को लेकर मंगलवार को लोकसभा में गंभीर सवाल उठाए गए। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद शताब्दी रॉय ने रेल मंत्रालय के बजट पर चर्चा के दौरान दावा किया कि रेलवे का सिस्टम बुजुर्गों के प्रति असंवेदनशील होता जा रहा है।

प्रमुख बिंदु और उठाए गए सवाल:

  • सीट आवंटन में विसंगति: शताब्दी रॉय ने आरोप लगाया कि 70-80 साल के बुजुर्गों को 'ऊपर की बर्थ' आवंटित की जा रही है, जबकि तत्काल कोटा या अन्य माध्यमों से युवाओं को 'नीचे की सीट' मिल जाती है। उन्होंने एक हालिया घटना का जिक्र किया जिसमें ऊपर की सीट से गिरने के कारण एक बुजुर्ग महिला का पैर टूट गया।

  • रियायत की बहाली: सांसद ने मांग की कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल किराये में मिलने वाली रियायत (Concession), जिसे कोविड-19 के दौरान बंद कर दिया गया था, उसे तुरंत बहाल किया जाए।

  • राजस्व बनाम सेवा: रॉय ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार का ध्यान बुजुर्गों की सहूलियत पर नहीं, बल्कि केवल राजस्व बढ़ाने पर है। उन्होंने टिकट रद्दीकरण (Cancellation) शुल्क के जरिए हो रही कमाई पर भी आपत्ति जताई।

सत्ता पक्ष का रुख:

वहीं, चर्चा में भाग लेते हुए लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि देश में रेलवे का बुनियादी ढांचा अब सही मायनों में विस्तार ले रहा है और आधुनिकीकरण से आम यात्रियों को लाभ मिल रहा है।

"रेलवे कहता है कि बुजुर्गों को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। बुजुर्गों के लिए यात्रा कष्टकारी होती जा रही है।" — शताब्दी रॉय, सांसद (TMC)

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