खेती को 'लाभ का धंधा' बनाने का नया मंत्र: छोटे किसानों के लिए 'एकीकृत मॉडल' और तंबाकू के बदले वैकल्पिक फसलों पर जोर
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खेती को 'लाभ का धंधा' बनाने का नया मंत्र: छोटे किसानों के लिए 'एकीकृत मॉडल' और तंबाकू के बदले वैकल्पिक फसलों पर जोर

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: केंद्र सरकार देश में खेती की तस्वीर बदलने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। मंगलवार को लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि सरकार का ध्यान अब केवल खाद्यान्न उत्पादन पर नहीं, बल्कि 'एकीकृत खेती' (Integrated Farming) पर है, जिससे कम जमीन वाले किसानों की आमदनी में कई गुना वृद्धि होगी।

एकीकृत खेती (Integrated Farming) के मुख्य बिंदु:

  • विविधीकरण: छोटे किसान अब केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहेंगे। उन्हें एक ही समय में खाद्यान्न, सब्जी और फल उगाने के साथ-साथ मछली पालन, पशुपालन और वानिकी (Forestry) जैसे क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है।

  • सरकारी समर्थन: सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में इन मॉडलों का प्रदर्शन (Demonstration) शुरू कर दिया है ताकि किसान प्रत्यक्ष रूप से इसके लाभ देख सकें।

तंबाकू खेती के खिलाफ बड़ी मुहिम:

देश में तंबाकू के सेवन से होने वाली सालाना 13 लाख मौतों पर चिंता जताते हुए कृषि मंत्री ने तंबाकू उत्पादक किसानों के लिए विशेष योजना की जानकारी दी:

  • वैकल्पिक फसलें: किसानों को तंबाकू छोड़कर मक्का, मिर्च, शकरकंद, रागी, मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों की ओर मोड़ा जा रहा है।

  • बजट और प्रोत्साहन: तंबाकू उत्पादक राज्यों (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात आदि) में फसल विविधीकरण के लिए 538.40 करोड़ रुपये की नई योजना स्वीकृत की गई है।

  • कर्नाटक की सराहना: कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कर्नाटक सरकार की तारीफ की, जिसने 30,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में तंबाकू की खेती कम कर वैकल्पिक फसलों को अपनाया है।

"हमारा लक्ष्य है कि छोटा किसान भी आत्मनिर्भर बने। एकीकृत खेती के जरिए हम जोखिम को कम करेंगे और हर मौसम में किसान की आय सुनिश्चित करेंगे।" — शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री

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