राज्यसभा में उठी युवाओं के भविष्य और सार्वजनिक सुरक्षा की चिंता: वेब सीरीज के प्रभाव से लेकर जर्जर बसों तक पर तीखी बहस
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राज्यसभा में उठी युवाओं के भविष्य और सार्वजनिक सुरक्षा की चिंता: वेब सीरीज के प्रभाव से लेकर जर्जर बसों तक पर तीखी बहस

12, 2, 2026

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नई दिल्ली: संसद के उच्च सदन में मंगलवार को शून्यकाल के दौरान जनहित से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे गूंजे। सांसदों ने मनोरंजन जगत की जिम्मेदारी, सड़क सुरक्षा और चिकित्सा पद्धतियों के संरक्षण को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

प्रमुख मुद्दे और सांसदों की मांगें:

  • मनोरंजन का युवाओं पर असर: भाजपा सांसद सदानंद शेट तनावड़े ने वेब सीरीज और फिल्मों में दिखाए जाने वाले दृश्यों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवा अपने पसंदीदा नायकों को धूम्रपान करते देख उसकी नकल करते हैं, जो बाद में निकोटिन की घातक लत बन जाती है। उन्होंने निर्माताओं से सामग्री चयन में अधिक जिम्मेदारी बरतने की अपील की।

  • सार्वजनिक परिवहन की बदहाली: सांसद धर्मशीला गुप्ता ने अलीगढ़ की एक हृदयविदारक घटना का जिक्र किया, जहाँ बस का फर्श टूटने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। उन्होंने मांग की कि खस्ताहाल बसों को तुरंत सेवा से हटाया जाए और सार्वजनिक परिवहन का नियमित रखरखाव सुनिश्चित हो।

  • होमियोपैथी और आदिवासी ज्ञान: झामुमो की महुआ माझी ने होमियोपैथी और आदिवासियों के पारंपरिक जड़ी-बूटियों के ज्ञान के दस्तावेजीकरण की मांग की। उन्होंने झारखंड में एक विशेष अनुसंधान संस्थान स्थापित करने का सुझाव दिया।

  • ई-फार्मेसी पर नकेल: राजद के मनोज कुमार झा ने ऑनलाइन कन्सल्टेन्सी और ई-फार्मेसी के लिए कड़े नियम बनाने की जरूरत बताई, ताकि दवाओं के दुरुपयोग को रोका जा सके।

  • खेल अवसंरचना का विस्तार: भाजपा के बाबूभाई देसाई ने अहमदाबाद के 'वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स' की तर्ज पर गुजरात के हर जिले में ओलंपिक स्तर की सुविधाओं वाले खेल परिसर बनाने की मांग की।

चर्चा में अन्य सहभागी:

शून्यकाल के दौरान गुलाम अली, नीरज डांगी, रजनी पाटिल और सैयद नासिर हुसैन सहित कई अन्य सदस्यों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों और लोक महत्व के विषयों को सदन के पटल पर रखा।

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