लोकसभा में 'भाई साहब' संबोधन पर टोका-टाकी: पीठासीन सभापति ने भाजपा सांसद को सिखाई संसदीय मर्यादा, सदन में गूंजे ठहाके
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लोकसभा में 'भाई साहब' संबोधन पर टोका-टाकी: पीठासीन सभापति ने भाजपा सांसद को सिखाई संसदीय मर्यादा, सदन में गूंजे ठहाके

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: संसद के निचले सदन (लोकसभा) में मंगलवार को उस समय हंसी के फव्वारे छूट पड़े, जब रेल बजट पर चर्चा के दौरान एक सदस्य ने आसन को 'भाई साहब' कहकर संबोधित कर दिया। पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि लोकतंत्र के इस मंदिर में आसन के लिए संबोधन की एक गरिमामयी 'लक्ष्मण रेखा' है।

क्या था पूरा मामला?

  • संबोधन पर आपत्ति: भाजपा सांसद राजेश मिश्रा रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर अपनी बात रख रहे थे। जब समय सीमा समाप्त होने पर सभापति ने उन्हें भाषण रोकने को कहा, तो मिश्रा ने भावुक होकर कहा— ‘‘एक मिनट भाई साहब, एक मिनट…कल मैं दिनभर बैठा हूं भाई साहब।’’

  • सभापति की हिदायत: इस अनौपचारिक संबोधन पर जगदंबिका पाल ने मुस्कुराते हुए गंभीर नसीहत दी। उन्होंने कहा कि आसन पर बैठे व्यक्ति को 'चेयरपर्सन', 'अधिष्ठाता' या 'सभापति' ही कहना चाहिए, 'भाई साहब' नहीं। यह सदन की स्थापित परंपराओं के विरुद्ध है।

रेलवे मीनू में 'महुआ' की मांग:

संबोधन के विवाद से इतर, सांसद राजेश मिश्रा ने एक अनूठा सुझाव भी दिया। उन्होंने मांग की कि भारतीय रेल के खान-पान (Catering) में महुआ के लड्डू और बिस्किट शामिल किए जाने चाहिए।

  • तर्क: उन्होंने दावा किया कि महुआ पूरी तरह 'शुगर फ्री' (चीनी रहित) और पौष्टिक होता है, जो यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए उत्तम विकल्प साबित हो सकता है।

प्रमुख बिंदु:

  1. संसदीय शिष्टाचार: सदन की नियमावली के अनुसार, सदस्य एक-दूसरे को या आसन को व्यक्तिगत रिश्तों के संबोधन से नहीं पुकार सकते।

  2. स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: महुआ को रेलवे में शामिल करने का सुझाव 'वोकल फॉर लोकल' और स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में एक दिलचस्प प्रस्ताव माना जा रहा है।

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