राहुल गांधी से 'सार्वजनिक माफी' की मांग: 204 पूर्व सैन्य अफसरों और नौकरशाहों ने पत्र लिख जताया कड़ा विरोध, संसद में आचरण पर उठाए सवाल
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राहुल गांधी से 'सार्वजनिक माफी' की मांग: 204 पूर्व सैन्य अफसरों और नौकरशाहों ने पत्र लिख जताया कड़ा विरोध, संसद में आचरण पर उठाए सवाल

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 12 मार्च को संसद परिसर के भीतर किए गए व्यवहार पर विवाद गहरा गया है। देश के 204 प्रतिष्ठित नागरिकों, जिनमें पूर्व राजदूत, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं, ने एक संयुक्त पत्र जारी कर राहुल गांधी से राष्ट्र से माफी मांगने की मांग की है।

विवाद की मुख्य वजह:

  • नियमों का उल्लंघन: पत्र में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देशों (संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन पर रोक) के बावजूद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने संसद की सीढ़ियों पर धरना दिया।

  • अशोभनीय आचरण: हस्ताक्षरकर्ताओं ने इस बात पर आपत्ति जताई कि संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाना सर्वोच्च विधायी संस्था की गरिमा के अनुकूल नहीं था। इसे 'राजनीतिक तमाशा' करार दिया गया है।

  • संस्थागत अवहेलना: पत्र के अनुसार, यह व्यवहार केवल प्रक्रिया का उल्लंघन नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति 'अहंकार और विशेषाधिकार' की भावना को दर्शाता है।

पत्र के प्रमुख अंश:

"संसद लोकतंत्र का मंदिर है और इसकी सीढ़ियां राजनीतिक नाटक का मंच नहीं हैं। राहुल गांधी को इस व्यवहार के लिए आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए ताकि संसदीय प्राधिकार की सुचिता बनी रहे।"

हस्ताक्षरकर्ता और समन्वयक:

यह मुहिम जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस. पी. वैद द्वारा समन्वित की गई है। इस पर हस्ताक्षर करने वालों में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली लोग शामिल हैं:

  1. पूर्व सैन्य अधिकारी: देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सेवानिवृत्त जनरल और कमांडर।

  2. पूर्व नौकरशाह: प्रशासन का लंबा अनुभव रखने वाले पूर्व आईएएस और आईपीएस अधिकारी।

  3. न्यायिक जगत: कानून की बारीकियों को समझने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता।

  4. डिप्लोमैट्स: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व राजदूत।

राजनीतिक गलियारों में हलचल:

विपक्ष के नेता पर इस तरह का संगठित दबाव यह दर्शाता है कि संसद के भीतर के आचरण की निगरानी अब केवल सदन के भीतर नहीं, बल्कि समाज के प्रबुद्ध वर्गों द्वारा भी की जा रही है। अब देखना यह है कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी इस खुले पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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