सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गोद लिए बच्चे की उम्र चाहे जो हो, मां को मिलेगा 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश; पितृत्व अवकाश पर भी केंद्र को निर्देश
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गोद लिए बच्चे की उम्र चाहे जो हो, मां को मिलेगा 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश; पितृत्व अवकाश पर भी केंद्र को निर्देश

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को प्रजनन स्वायत्तता और मातृत्व अधिकारों को लेकर एक क्रांतिकारी निर्णय सुनाया। शीर्ष अदालत ने उस कानूनी प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया, जो दत्तक माताओं को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) देने के लिए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम होने की शर्त रखता था।

अदालत के फैसले के मुख्य बिंदु:

  • उम्र की सीमा खत्म: न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कितनी भी हो।

  • संविधान का उल्लंघन: पीठ ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की धारा 60(4), जो बच्चे की आयु 3 महीने तक सीमित करती थी, संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।

  • प्रजनन स्वायत्तता: न्यायालय ने माना कि बच्चा गोद लेना एक महिला की प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) पर बड़ा निर्देश:

सुप्रीम कोर्ट ने केवल माताओं ही नहीं, बल्कि पिताओं के हक में भी बात की। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पितृत्व अवकाश को एक 'सामाजिक सुरक्षा लाभ' के रूप में मान्यता देने के लिए आवश्यक प्रावधान और कानून लेकर आए।

पृष्ठभूमि:

यह फैसला अधिवक्ता हम्सानंदिनी नंदूरी की याचिका पर आया है। उन्होंने दलील दी थी कि बड़े बच्चे को गोद लेने वाली माताओं को भी बच्चे के साथ तालमेल बिठाने और उसकी देखभाल के लिए समय की आवश्यकता होती है, जिसे कानून अब तक नजरअंदाज कर रहा था।

"बच्चे और मां के बीच भावनात्मक बंधन बनाने के लिए अवकाश जरूरी है। कानून को जैविक और दत्तक माता के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए।" — उच्चतम न्यायालय

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