ऊना दलित उत्पीड़न कांड: 5 दोषियों को 5-5 साल की जेल; विशेष अदालत ने सुनाई सख्त सजा, 35 आरोपी बरी

ऊना दलित उत्पीड़न कांड: 5 दोषियों को 5-5 साल की जेल; विशेष अदालत ने सुनाई सख्त सजा, 35 आरोपी बरी

12, 2, 2026

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वेरावल (गुजरात): गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के बहुचर्चित 'ऊना कोड़ा कांड' में न्याय की घड़ी आ गई है। वर्ष 2016 में मृत गाय की खाल उतारने के दौरान चार दलित युवकों की बेरहमी से पिटाई करने के मामले में वेरावल की विशेष अदालत ने मंगलवार को पांच मुख्य दोषियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अदालती फैसले के मुख्य बिंदु:

  • कड़ी सजा और जुर्माना: विशेष न्यायाधीश जे जे पांड्या ने दोषियों को एससी/एसटी (SC/ST) अधिनियम के तहत 5 वर्ष की अधिकतम जेल की सजा सुनाई। साथ ही, प्रत्येक दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

  • विभिन्न धाराओं में दोषसिद्धि: अदालत ने दोषियों को केवल एससी/एसटी एक्ट ही नहीं, बल्कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की अन्य धाराओं के तहत भी सजा सुनाई है:

    • धारा 323 और 324 (मारपीट): 3 वर्ष का कारावास।

    • धारा 342 (बंधक बनाना): 1 वर्ष का कारावास।

    • धारा 504 (अपमानित करना): 2 वर्ष का कारावास। (नोट: ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।)

  • 35 आरोपी बरी: सोमवार को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में इस मामले के 35 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।

क्या थी 2016 की वह घटना?

11 जुलाई 2016 को ऊना के निकट मोटा समधियाला गांव में चार दलित युवक अपने पुश्तैनी काम के तहत एक मृत गाय की खाल उतार रहे थे। तभी कथित 'गौ रक्षकों' की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। उन्हें कार से बांधकर घसीटा गया और सरेआम कोड़े मारे गए। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में दलित समुदाय ने व्यापक प्रदर्शन किए थे और यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था।

फैसले का महत्व:

यह फैसला सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा संदेश है कि जातिगत आधार पर हिंसा और अमानवीय व्यवहार करने वालों के खिलाफ कानून अपनी पूरी सख्ती के साथ खड़ा है।

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