लोकसभा में रेल बजट पर घमासान: गाजियाबाद को 'सैटेलाइट स्टेशन' बनाने की मांग, विपक्ष ने रेलवे को बताया 'मुनाफे की रेखा'

लोकसभा में रेल बजट पर घमासान: गाजियाबाद को 'सैटेलाइट स्टेशन' बनाने की मांग, विपक्ष ने रेलवे को बताया 'मुनाफे की रेखा'

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: संसद के निचले सदन में मंगलवार को रेल मंत्रालय के बजट पर चर्चा के दौरान दिल्ली के स्टेशनों पर बढ़ते दबाव और क्षेत्रीय उपेक्षा के सवाल गूंजे। गाजियाबाद से भाजपा सांसद अतुल गर्ग ने दिल्ली के बोझ को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा, जबकि कांग्रेस सांसदों ने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।

प्रमुख मांगें और तर्क (सत्तापक्ष):

  • गाजियाबाद बनेगा नया हब?: सांसद अतुल गर्ग ने मांग की कि गाजियाबाद को दिल्ली का 'उपनगरीय (Satellite) स्टेशन' घोषित किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यूपी और बिहार जाने वाली कई ट्रेनें दिल्ली से चलती हैं पर गाजियाबाद नहीं रुकतीं। यदि इन्हें गाजियाबाद से संचालित किया जाए, तो नई दिल्ली और आनंद विहार जैसे स्टेशनों पर भीड़ कम होगी।

  • फार्मेसी और जोनल बैठकें: भाजपा के कामाख्या प्रसाद तासा ने स्टेशनों पर फार्मेसी की सुविधा और रेलवे बोर्ड के पत्रों का त्वरित जवाब सुनिश्चित करने की मांग की।

विपक्ष के तीखे प्रहार:

  • 'दुधारू गाय' बना छत्तीसगढ़: कोरबा से कांग्रेस सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि रेलवे छत्तीसगढ़ से कोयले के जरिए अरबों कमाती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर हाथ पीछे खींच लेती है। उन्होंने तंज कसा कि वंदे भारत का विज्ञापन उन यात्रियों के लिए "जले पर नमक" जैसा है जो पैसेंजर ट्रेन के लिए 4-4 घंटे इंतजार करते हैं।

  • तकनीकी खामियां: कांग्रेस के राहुल कस्वां ने एलएचबी (LHB) कोचों की सराहना तो की, लेकिन चेतावनी दी कि 38 साल पुरानी यह जर्मन तकनीक अब भी 'झटकों' (Coupling issues) की समस्या से जूझ रही है। उन्होंने सामान्य श्रेणी के यात्रियों के लिए विशेष सुपरफास्ट ट्रेनें चलाने का सुझाव दिया।

  • अर्थव्यवस्था की रीढ़: केरल कांग्रेस के के. फ्रांसिस जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि रेलवे केवल घोषणाओं के सहारे नहीं, बल्कि ठोस धरातलीय कार्यों से चलेगी।

चर्चा के मुख्य निष्कर्ष:

  1. विकेंद्रीकरण: दिल्ली के स्टेशनों का दबाव कम करने के लिए गाजियाबाद, सराय रोहिल्ला और आनंद विहार जैसे केंद्रों को और सशक्त बनाने की जरूरत।

  2. सुरक्षा और आराम: पारंपरिक आईसीएफ डिब्बों की जगह सुरक्षित एलएचबी डिब्बों का विस्तार, लेकिन तकनीक को और आधुनिक बनाने की आवश्यकता।

  3. आम आदमी बनाम प्रीमियम: वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों और आम आदमी की पैसेंजर ट्रेनों के बीच संतुलन बिठाने की चुनौती।

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