रूप नगर पुल हादसा: 'मौत के रास्ते' से चंद मिनट पहले गुजरे थे सैकड़ों छात्र; स्थानीय बोले— एक घंटा पहले गिरता तो बिछ जातीं लाशें

रूप नगर पुल हादसा: 'मौत के रास्ते' से चंद मिनट पहले गुजरे थे सैकड़ों छात्र; स्थानीय बोले— एक घंटा पहले गिरता तो बिछ जातीं लाशें

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: उत्तरी दिल्ली के रूप नगर में नाले पर बना 60 फुट लंबा लोहे का पुल मंगलवार सुबह जब ढहा, तो उसने प्रशासन की लापरवाही और सुरक्षा के खोखले दावों की पोल खोल दी। स्थानीय लोगों का दावा है कि सुबह 9:30 बजे हुए इस हादसे से ठीक एक घंटा पहले तक यह पुल सैकड़ों स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों से खचाखच भरा हुआ था।

त्रासदी जो टल गई (पर सबक दे गई):

  • स्कूली बच्चों का मुख्य मार्ग: यह पुल गुड़ मंडी को रूप नगर से जोड़ता था और 7 सरकारी व निजी स्कूलों के लिए लाइफलाइन था। सुबह 7:00 से 8:30 बजे के बीच सैकड़ों छात्र इसी शॉर्टकट का इस्तेमाल करते थे क्योंकि इससे 1 किलोमीटर की दूरी और 30 मिनट का समय बचता था।

  • किस्मत का सहारा: स्थानीय निवासी नीता विपुल के अनुसार, "अधिकतर छात्र स्कूल पहुँच चुके थे, वरना यह दिल्ली का सबसे बड़ा रेल/पुल हादसा बन सकता था।"

प्रशासनिक विफलता पर उठे सवाल:

  1. असुरक्षित लेकिन खुला: पुल को सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने 'असुरक्षित' घोषित कर रखा था, लेकिन वहां केवल खानापूर्ति के लिए अवरोधक (Barricades) लगाए गए थे।

  2. सुरक्षाकर्मी की अनुपस्थिति: स्थानीय लोगों का आरोप है कि वहां एक भी गार्ड तैनात नहीं था जो लोगों को जान जोखिम में डालने से रोक सके।

  3. वैकल्पिक मार्ग का अभाव: विकास कुमार नामक निवासी ने बताया कि कोई सुविधाजनक दूसरा रास्ता न होने के कारण लोग मजबूरन इस जर्जर पुल का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसकी शिकायत कई बार की गई थी।

हादसे का शिकार:

हादसे के समय पुल के किनारे मौजूद एक 50 वर्षीय महिला (संभावित भिखारी) की नाले में गिरने और मलबे में दबने से मौत हो गई। दिल्ली पुलिस, NDRF और DFS ने मिलकर शव को बाहर निकाला।

जनता का आक्रोश:

स्थानीय निवासी मयंक और अन्य लोगों का कहना है कि "चेतावनी के बोर्ड और अवरोधक" तब तक बेअसर हैं जब तक कि जर्जर ढांचे को पूरी तरह हटाया न जाए या प्रभावी ढंग से सील न किया जाए।

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