ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में भारत की लंबी छलांग: 3000 MW इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता आवंटित; 2030 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में भारत की लंबी छलांग: 3000 MW इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता आवंटित; 2030 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: केंद्र सरकार ने हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने के लिए संसाधनों का बड़ा आवंटन किया है। राज्यसभा में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) जारी किए गए हैं।

मिशन की वर्तमान प्रगति और आंकड़े:

  • इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता: सालाना 3,000 मेगावाट (MW) की इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण क्षमता आवंटित की गई है। इसके लिए सरकार 4,440 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन देगी।

  • हाइड्रोजन उत्पादन: सालाना 8,62,000 टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता आवंटित की जा चुकी है, जिसके लिए 5,294 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

  • रिफाइनरी क्षेत्र में उपयोग: सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) की रिफाइनरी जरूरतों के लिए 20,000 टन सालाना उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है, जिसमें 240 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन शामिल है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के मुख्य लक्ष्य:

  1. उत्पादन क्षमता: वर्ष 2030 तक सालाना 50 लाख टन (5 MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।

  2. नवीकरणीय ऊर्जा: इस उत्पादन के लिए लगभग 125 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की आवश्यकता होगी।

  3. रोजगार और निवेश: मिशन से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 6 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

  4. कार्बन उत्सर्जन में कमी: सालाना लगभग 50 एमएमटी (MMT) कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य।

क्या है 'इलेक्ट्रोलाइज़र' और क्यों है जरूरी?

इलेक्ट्रोलाइज़र वह तकनीक है जो बिजली (Renewable Energy) का उपयोग करके पानी ($H_2O$) को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करती है। जब यह बिजली सौर या पवन ऊर्जा से आती है, तो उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन को 'हरित हाइड्रोजन' कहा जाता है। भारत का स्वयं इलेक्ट्रोलाइज़र बनाना चीन और यूरोप पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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