भारतीय मिशनों पर मंडराता खतरा: संसदीय समिति ने की 'तत्काल सुरक्षा ऑडिट' की मांग, दूतावासों की सुरक्षा के लिए अलग बजट बनाने की सिफारिश

भारतीय मिशनों पर मंडराता खतरा: संसदीय समिति ने की 'तत्काल सुरक्षा ऑडिट' की मांग, दूतावासों की सुरक्षा के लिए अलग बजट बनाने की सिफारिश

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक संघर्षों के बीच, संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने भारत सरकार से विदेशों में स्थित अपने राजनयिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से पुख्ता करने को कहा है। समिति ने इस बात पर हैरानी और चिंता जताई है कि वर्तमान में 'मिशन सुरक्षा' के लिए विदेश मंत्रालय के पास कोई विशिष्ट बजट हेड (Specific Budget Head) ही नहीं है।

समिति की प्रमुख सिफारिशें:

  • विशेष बजट उप-मद (Sub-head): समिति ने जोरदार सिफारिश की है कि मंत्रालय 'मिशन सुरक्षा' के लिए बजट में एक अलग केटेगरी बनाए। अभी तक सुरक्षा का खर्च सामान्य मदों से निकाला जाता है, जो पर्याप्त नहीं है।

  • तत्काल सुरक्षा ऑडिट: दुनिया भर के 219 भारतीय मिशनों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। इसमें उन देशों और शहरों को प्राथमिकता दी जाए जिन्हें 'हाई रिस्क ज़ोन' माना जाता है।

  • समयबद्ध सुरक्षा योजना: ऑडिट के बाद एक निश्चित समय-सीमा के भीतर सुरक्षा उपकरणों, कर्मियों और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने की योजना बनाई जाए।

पड़ोसी देशों को सहायता: बजट में बड़े बदलाव

वित्त वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर आधारित इस रिपोर्ट में पड़ोसी देशों को दी जाने वाली मदद के आंकड़ों में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं:

  1. बांग्लादेश सहायता में 50% की कटौती: बांग्लादेश के लिए आवंटित बजट को 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

  2. कारण: विदेश मंत्रालय के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल और सुरक्षा संबंधी अशांति के कारण वहां जारी प्रोजेक्ट्स की गति धीमी हुई है और फिलहाल कोई नई परियोजना शुरू नहीं की गई है।

सांस्कृतिक केंद्रों पर नजर:

समिति ने केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विदेशों में भारत की 'सॉफ्ट पावर' यानी सांस्कृतिक केंद्रों की स्थिति पर भी चर्चा की है। विशेष रूप से पेरिस और वॉशिंगटन में भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों के कामकाज और उनकी वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • समिति के अध्यक्ष: डॉ. शशि थरूर (सांसद, कांग्रेस)।

  • रिपोर्ट का आधार: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विदेश मंत्रालय की अनुदान मांगें।

  • कुल सिफारिशें: 62 (सुरक्षा, पासपोर्ट सुविधा और कूटनीतिक सहायता सहित)।

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