पेंशनभोगियों और गिग वर्कर्स के लिए बड़ी सिफारिश: संसदीय समिति ने न्यूनतम ₹1000 पेंशन बढ़ाने और ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण का दिया सुझाव

पेंशनभोगियों और गिग वर्कर्स के लिए बड़ी सिफारिश: संसदीय समिति ने न्यूनतम ₹1000 पेंशन बढ़ाने और ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण का दिया सुझाव

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली 'श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी स्थायी समिति' ने मंगलवार को लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 1995 के तहत दी जाने वाली न्यूनतम राशि को तुरंत बढ़ाया जाए, क्योंकि वर्तमान महंगाई के दौर में ₹1,000 की राशि अत्यंत कम है।

प्रमुख सिफारिशें और महत्वपूर्ण बिंदु:

  • न्यूनतम पेंशन में वृद्धि: समिति ने EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा और बढ़ोतरी की मांग की है। साथ ही, कमजोर वर्ग के श्रमिकों की वास्तविक आय को सुरक्षित रखने के लिए एक 'स्वचालित आवधिक संशोधन तंत्र' (Automatic Periodic Revision Mechanism) बनाने का सुझाव दिया है, ताकि समय-समय पर पेंशन खुद-ब-खुद बढ़ती रहे।

  • गिग श्रमिकों (Gig Workers) के लिए सुरक्षा: * ई-श्रम पोर्टल पर 'एग्रीगेटर्स' (जैसे जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर आदि) के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है।

    • एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने को कहा गया है ताकि इन श्रमिकों को बीमा और दुर्घटना कवर जैसी सामाजिक सुरक्षा मिल सके।

  • बाल श्रम उन्मूलन पर पुनर्विचार: रिपोर्ट में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) के 'सर्व शिक्षा अभियान' में विलय के फैसले पर फिर से विचार करने की सलाह दी गई है। समिति का मानना है कि बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन और बच्चों के पुनर्वास के लिए एक समर्पित और विशेष ध्यान देने वाली योजना की आवश्यकता है।

EPS-95 क्या है?

यह संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक सेवानिवृत्ति योजना है। इसके तहत:

  1. पात्रता: कम से कम 10 साल की निरंतर सेवा।

  2. आयु: 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर मासिक पेंशन शुरू होती है।

  3. वर्तमान स्थिति: वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 तय है, जिसे बढ़ाने की मांग लंबे समय से देश भर के पेंशनभोगी संगठन कर रहे हैं।

गिग श्रमिकों के लिए ई-श्रम पोर्टल का महत्व:

ई-श्रम पोर्टल असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस है। समिति का मानना है कि यदि कंपनियां (एग्रीगेटर्स) अपने पार्टनर्स का पंजीकरण अनिवार्य रूप से करती हैं, तो सरकार के लिए उन तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाना आसान होगा।

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