पत्नी को जलाने के मामले में पति की उम्रकैद बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा— 'बेटी अपने पिता के खिलाफ झूठी गवाही क्यों देगी?'

पत्नी को जलाने के मामले में पति की उम्रकैद बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा— 'बेटी अपने पिता के खिलाफ झूठी गवाही क्यों देगी?'

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2000 के एक जघन्य हत्याकांड में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले पर मुहर लगाते हुए आरोपी पति की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमुूर्ति पंकज मिथल और न्यायमुूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने माना कि आरोपी ने ही अपनी पत्नी पर केरोसिन डालकर उसे आग के हवाले किया था।

केस के मुख्य आधार और साक्ष्य:

  • मृत्यु पूर्व बयान (Dying Declaration): अदालत ने कहा कि पीड़िता ने मृत्यु से पहले जो बयान दिया था, उस पर संदेह करने का कोई ठोस कारण नहीं है। कानूनन, एक मरता हुआ व्यक्ति झूठ नहीं बोलता ( Nemo Moriturus Praesumitur Mentire )।

  • बेटी की गवाही: इस मामले में दंपती की बड़ी बेटी घटना की चश्मदीद गवाह थी। पीठ ने उसकी गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना।

    • अदालत की टिप्पणी: "रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि एक बेटी अपने ही पिता को झूठा फंसाने के लिए गवाही देगी।" बेटी के बयान ने साफ कर दिया कि पिता ही केरोसिन लेकर आए और मां को जलाया।

  • निचली अदालत बनाम उच्च न्यायालय: * शुरुआत में अधीनस्थ अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया था।

    • सितंबर 2010 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उस फैसले को पलटते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी सजा को सही ठहराया है।

कानूनी महत्व:

यह फैसला भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) के तहत धारा 32(1) की प्रासंगिकता को दोहराता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी प्रत्यक्षदर्शी (विशेषकर परिवार के सदस्य) की गवाही और मृत्यु पूर्व कथन मेल खाते हैं, तो वह दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त आधार है।

मामले की पृष्ठभूमि:

यह घटना साल 2000 की है। आरोपी ने घरेलू विवाद या अन्य कारणों से अपनी पत्नी पर मिट्टी का तेल (केरोसिन) छिड़क कर उसे आग लगा दी थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, अब 2026 में देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।

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