संसद में कृषि बजट पर घमासान: भाजपा ने गिनाईं उपलब्धियां; कांग्रेस बोली— "लागत वसूली को लेकर डरा हुआ है किसान"
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संसद में कृषि बजट पर घमासान: भाजपा ने गिनाईं उपलब्धियां; कांग्रेस बोली— "लागत वसूली को लेकर डरा हुआ है किसान"

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी और कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच वाकयुद्ध हुआ। रेड्डी ने मोदी सरकार की नीतियों को ग्रामीण भारत की प्रगति का आधार बताया।

भाजपा (सत्ता पक्ष) का पक्ष और आंकड़े:

  • बजट में भारी बढ़ोतरी: रेड्डी ने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में कृषि बजट मात्र ₹22,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।

  • उत्पादन के रिकॉर्ड: * चावल के उत्पादन में 60% की वृद्धि दर्ज की गई है।

    • भारत के इतिहास में पहली बार बागवानी (Horticulture) उत्पादन, अनाज उत्पादन से अधिक हुआ है।

  • लागत नियंत्रण: वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में युद्ध (Middle East Crisis) के बावजूद भारत में डीजल की कीमतों को स्थिर रखकर किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ने दिया गया।

  • MSP में सुधार: सरकार ने सभी प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

कांग्रेस (विपक्ष) की चिंताएं:

  • आर्थिक असुरक्षा: राजा वड़िंग ने आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियों के कारण किसान खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्हें डर है कि फसल की बिक्री से उनकी लागत (Input Cost) भी वसूल हो पाएगी या नहीं।

  • जमीनी हकीकत: वड़िंग ने पंजाब के उदाहरण देते हुए कृषि संकट और ऋणग्रस्तता की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया।

तुलनात्मक विश्लेषण:

मानकपूर्ववर्ती सरकार (कांग्रेस)वर्तमान सरकार (भाजपा)
कृषि बजट₹22,000 करोड़₹1,00,000 करोड़ +
चावल उत्पादनआधार स्तर60% की वृद्धि
फोकसपारंपरिक अनाजअनाज + बागवानी
ईंधन प्रबंधनबाजार आधारित उतार-चढ़ावयुद्ध के बावजूद स्थिर दाम (दावा)

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