राज्यसभा में विदाई की गूँज: प्रेमचंद गुप्ता को खली 'सेंट्रल हॉल' की आत्मीयता; बोले— "अब वो पुरानी बात नहीं रही"
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राज्यसभा में विदाई की गूँज: प्रेमचंद गुप्ता को खली 'सेंट्रल हॉल' की आत्मीयता; बोले— "अब वो पुरानी बात नहीं रही"

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: बुधवार को उच्च सदन में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों ने अपने दशकों लंबे विधायी सफर को याद किया। इस दौरान पुराने संसद भवन के 'समानतावादी' माहौल और नए भवन की 'समूह संस्कृति' के बीच के अंतर पर भावुक चर्चा हुई।

प्रमुख सांसदों के संबोधन और उनके संदेश:

1. प्रेमचंद गुप्ता (RJD): "सेंट्रल हॉल में कोई भेदभाव नहीं था"

  • अनुभव: 30 साल के संसदीय जीवन को याद करते हुए गुप्ता ने कहा कि पुराने भवन का सेंट्रल हॉल एक ऐसी जगह थी जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की दीवारें गिर जाती थीं। लोग साथ बैठकर सुख-दुख साझा करते थे।

  • बदलाव: उन्होंने कहा कि नए भवन में अब 'लाउंज' तो हैं, लेकिन लोग अक्सर अपने-अपने समूहों में बंटे नजर आते हैं, वह पुरानी एकजुटता कम हुई है।

  • राजनीतिक सफर: उन्होंने याद किया कि कैसे एक कारोबारी से राजनेता बनने तक का उनका सफर लालू प्रसाद यादव के कहने पर शुरू हुआ था।

2. एम. थंबीदुरै (AIADMK): "संसद मेरा दूसरा घर"

  • मांग: उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सभी क्षेत्रीय भाषाओं को 'आधिकारिक भाषा' का दर्जा मिलना चाहिए।

  • महत्व: उन्होंने राज्यसभा को देश की सर्वोत्तम प्रवृत्तियों का दर्पण बताया।

3. जॉन ब्रिटास (CPIM): "सदन की विविधता का सम्मान"

  • सराहना: उन्होंने उपसभापति हरिवंश की निष्पक्षता की तारीफ की।

  • विशेष टिप्पणी: शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी को उन्होंने सदन की ‘पेज थ्री पर्सनैलिटी’ (चर्चित व्यक्तित्व) कहकर उनकी सक्रियता की सराहना की।

4. दिग्गज नेताओं की राय:

  • दिग्विजय सिंह (Congress): उन्होंने सुझाव दिया कि विधेयकों को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय चर्चा और संवाद (Dialogue) को प्राथमिकता देनी चाहिए।

  • प्रफुल्ल पटेल (NCP): उन्होंने शरद पवार के पुन: निर्वाचित होने का स्वागत किया और उन्हें अपना मार्गदर्शक बताया।

सदन में साझा किए गए विविध विचार:

  • तेलुगु में विदाई: वाईएसआर कांग्रेस के सुभाषचंद्र बोस पिल्ली ने अपनी मातृभाषा में विचार रखकर भाषाई गौरव का परिचय दिया।

  • संसदीय टीम वर्क: बीआरएस के सुरेश रेड्डी ने कहा कि सदन चलाने में चपरासी से लेकर सचिव तक हर व्यक्ति की भूमिका अहम होती है।


विदाई लेने वाले प्रमुख वक्ता:

इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में शक्तिसिंह गोहिल (कांग्रेस), जावेद अली खान (सपा), कनिमोझी एनवीएन सोमू (द्रमुक), अशोक कुमार मित्तल (आप) और भगवत कराड़ (भाजपा) सहित कई अन्य सांसदों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

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