कठुआ कांड: मुख्य साजिशकर्ता सांझी राम की याचिका हाईकोर्ट में खारिज; "इस स्तर पर रियायत नहीं दी जा सकती"
आज की ताजा खबर
LIVE

कठुआ कांड: मुख्य साजिशकर्ता सांझी राम की याचिका हाईकोर्ट में खारिज; "इस स्तर पर रियायत नहीं दी जा सकती"

12, 2, 2026

10

image

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल और न्यायमूर्ति रमेश कुमारी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता किसी भी तरह की राहत का हकदार नहीं है।

अदालत का फैसला और टिप्पणी:

  • रियायत से इनकार: खंडपीठ ने 3 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि मामले के गुण-दोष (Merits) को देखते हुए, अदालत की राय में अपीलकर्ता को इस स्तर पर सजा के निलंबन की रियायत नहीं मिलनी चाहिए।

  • याचिका खारिज: उच्च न्यायालय ने सांझी राम के वकील की उन दलीलों को दरकिनार कर दिया जिसमें सजा को रोकने की मांग की गई थी।

सांझी राम के वकील की दलीलें:

वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद घई ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित तर्क रखे थे:

  1. सबूतों का अभाव: उन्होंने दावा किया कि 114 गवाहों से जिरह के बावजूद सांझी राम की सीधी संलिप्तता का कोई 'ठोस सबूत' पेश नहीं किया गया।

  2. जेल की अवधि: दलील दी गई कि सांझी राम पहले ही 8 साल से अधिक का समय जेल में काट चुका है, इसलिए उसे राहत मिलनी चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि (2018):

  • अपराध: जनवरी 2018 में कठुआ में एक 8 वर्षीय बंजारा बच्ची का अपहरण कर उसे एक मंदिर में बंधक बनाया गया, जहाँ उसके साथ सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी।

  • सजा: जून 2019 में पठानकोट की एक विशेष अदालत ने सांझी राम, दीपक खजूरिया और परवेश कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

  • साजिश: आरोपपत्र के अनुसार, सांझी राम इस पूरी घिनौनी साजिश का मुख्य सूत्रधार था, जिसका उद्देश्य बंजारा समुदाय को इलाके से डराकर भगाना था।

कानूनी पक्ष:

इस सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. चीमा और पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता मनदीप सिंह बसरा और अनुपिंदर बराड़ ने सजा बरकरार रखने और याचिका खारिज करने के पक्ष में दलीलें दीं।

Powered by Froala Editor