सौर PLI योजना: ₹24,000 करोड़ के बजट के बावजूद अब तक 'शून्य' भुगतान; सरकार ने सदन में बताई तकनीकी वजह
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सौर PLI योजना: ₹24,000 करोड़ के बजट के बावजूद अब तक 'शून्य' भुगतान; सरकार ने सदन में बताई तकनीकी वजह

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत फरवरी 2026 के अंत तक किसी भी सौर उपकरण निर्माता को प्रोत्साहन राशि जारी नहीं की गई है। हालांकि, इसका अर्थ योजना की विफलता नहीं, बल्कि इसके कड़े 'परफॉरमेंस' (Performance) मानक हैं।

भुगतान न होने का मुख्य कारण:

मंत्री प्रह्लाद जोशी ने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि योजना के नियमों के अनुसार:

  • एक वर्ष का अंतराल: सफल बोलीदाताओं (Bidders) को प्रोत्साहन राशि (PLI) तभी जारी की जाती है, जब उनकी विनिर्माण परियोजना पूरी तरह चालू (Commissioned) होने का एक वर्ष पूरा कर लेती है।

  • सत्यापन: सरकार एक साल तक वास्तविक उत्पादन और मॉड्यूल की दक्षता (Efficiency) की जांच करती है, उसके बाद ही धनराशि जारी की जाती है।

योजना की वर्तमान प्रगति (फरवरी 2026 तक):

  • कुल परिव्यय: ₹24,000 करोड़।

  • क्षमता लक्ष्य: सरकार ने अब तक 48,337 मेगावाट (MW) क्षमता के पूर्ण या आंशिक रूप से एकीकृत सौर पीवी मॉड्यूल विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए अनुमति पत्र (Letters of Award) जारी कर दिए हैं।

  • उद्देश्य: चीन पर निर्भरता कम करना और भारत को वैश्विक सौर विनिर्माण हब बनाना।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. उच्च दक्षता: यह प्रोत्साहन केवल उन्हीं मॉड्यूल्स के लिए है जो उच्च दक्षता (High Efficiency) के मानकों को पूरा करते हैं।

  2. घरेलू मूल्यवर्धन: पीएलआई का लाभ लेने के लिए निर्माताओं को भारत में ही कच्चे माल (Polysilicon, Ingot, Wafer) का प्रसंस्करण करना अनिवार्य है।

  3. रोजगार: इस योजना से देश में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष:

यद्यपि अब तक कोई धनराशि जारी नहीं हुई है, लेकिन धरातल पर फैक्टरियां स्थापित होने का काम तेजी से चल रहा है। 2026 के उत्तरार्ध और 2027 की शुरुआत में पहली खेप के रूप में बड़ी प्रोत्साहन राशि जारी होने की संभावना है।

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