पंजाब का राजस्थान से ₹1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी का दावा: सीएम भगवंत मान बोले— "1960 के बाद से बकाया है पानी का पैसा"
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पंजाब का राजस्थान से ₹1.44 लाख करोड़ की रॉयल्टी का दावा: सीएम भगवंत मान बोले— "1960 के बाद से बकाया है पानी का पैसा"

12, 2, 2026

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चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि पंजाब अपनी प्राकृतिक संपदा (पानी) का मुफ्त इस्तेमाल अब और नहीं होने देगा। उन्होंने राजस्थान को मिलने वाले पानी के बदले पुरानी दरों पर बकाया राशि का हिसाब सार्वजनिक किया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के 5 प्रमुख तर्क:

  1. 1920 का त्रिपक्षीय समझौता: मान ने बताया कि ब्रिटिश सरकार, बहावलपुर रियासत (अब पाकिस्तान) और बीकानेर के महाराजा के बीच 1920 में एक समझौता हुआ था। इसी के आधार पर राजस्थान को पानी मिलना शुरू हुआ था और इसके बदले रॉयल्टी देने का प्रावधान था।

  2. 1960 तक हुआ भुगतान: मुख्यमंत्री का दावा है कि राजस्थान सरकार ने 1960 तक नियमित रूप से पंजाब को पानी का शुल्क दिया था, लेकिन उसके बाद अचानक भुगतान बंद कर दिया और तत्कालीन पंजाब सरकारों ने भी इसे गंभीरता से नहीं मांगा।

  3. बकाया राशि का हिसाब: पंजाब सरकार के आकलन के अनुसार, 1960 से लेकर अब तक (66 वर्षों का) कुल बकाया ₹1,44,000 करोड़ हो चुका है। मान ने दो टूक कहा, "अगर समझौता नहीं है, तो पानी लेना बंद करें, और अगर पानी ले रहे हैं, तो पैसा देना होगा।"

  4. वर्तमान जल आपूर्ति: वर्तमान में 'राजस्थान फीडर' के माध्यम से पड़ोसी राज्य को 18,000 क्यूसेक पानी मिल रहा है। पंजाब का तर्क है कि राज्य खुद पानी की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में मुफ्त आपूर्ति संभव नहीं है।

  5. अगला कदम: पंजाब सरकार ने इस संबंध में राजस्थान सरकार को औपचारिक पत्र लिखा है और इस विवाद में केंद्र सरकार को भी मध्यस्थ बनाने की बात कही है।

विवाद की संवेदनशीलता:

यह मुद्दा आने वाले समय में पंजाब और राजस्थान के बीच तनाव बढ़ा सकता है, क्योंकि:

  • संवैधानिक स्थिति: रिपेरियन सिद्धांतों (Riparian Rights) और अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियमों के तहत रॉयल्टी वसूलना एक जटिल कानूनी प्रक्रिया है।

  • राजनीतिक असर: राजस्थान के किसान इस पानी पर पूरी तरह निर्भर हैं, विशेषकर गंगानगर और बीकानेर बेल्ट में। शुल्क लगाने के प्रस्ताव का वहां कड़ा विरोध हो सकता है।

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