हिमाचल विधानसभा में 'कर्ज' पर संग्राम: सुक्खू सरकार के खिलाफ भाजपा का विशेषाधिकार हनन नोटिस; जयराम ठाकुर ने उठाए आंकड़ों पर सवाल
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हिमाचल विधानसभा में 'कर्ज' पर संग्राम: सुक्खू सरकार के खिलाफ भाजपा का विशेषाधिकार हनन नोटिस; जयराम ठाकुर ने उठाए आंकड़ों पर सवाल

12, 2, 2026

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शिमला: बजट सत्र के पुन: शुरू होते ही विपक्षी दल भाजपा ने मुख्यमंत्री पर हमला बोला। भाजपा विधायकों ने सदन में जोरदार नारेबाजी की और अध्यक्ष के कक्ष तक मार्च किया। विवाद की मुख्य जड़ राज्य सरकार द्वारा लिए गए ऋण (Loan) और उसके पुनर्भुगतान (Repayment) के अलग-अलग आंकड़े हैं।

जयराम ठाकुर द्वारा उठाए गए 3 प्रमुख विरोधाभास:

विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री के अलग-अलग तारीखों पर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए डेटा में विसंगतियां गिनाईं:

  1. अगस्त 2025 का बयान: मुख्यमंत्री ने कहा था कि ₹26,830 करोड़ का ऋण लिया गया, जिसमें से ₹8,253 करोड़ चुका दिए गए। बजट में भुगतान के लिए ₹10,581 करोड़ का प्रावधान था।

  2. 17 फरवरी का बयान: सरकार ने दावा किया कि ₹23,000 करोड़ जुटाए गए, जबकि ₹26,000 करोड़ चुका दिए गए।

  3. 18 फरवरी का बयान: एक नया आंकड़ा पेश करते हुए बताया गया कि 3 वर्षों में ₹35,482 करोड़ का कर्ज लिया गया और ₹27,043 करोड़ चुकाए गए।

भाजपा का मुख्य तर्क:

जयराम ठाकुर ने तकनीकी सवाल उठाया कि "जब चालू वित्त वर्ष (2025-26) के बजट में ऋण चुकाने के लिए केवल ₹10,581 करोड़ का प्रावधान है, तो सरकार ₹19,000 करोड़ का भुगतान कैसे कर सकती है?" भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री बिना वित्तीय आधार के झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं।

विशेषाधिकार हनन (Rule 75) क्या है?

  • भाजपा ने नियम 75 के तहत नोटिस दिया है।

  • इसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी सदस्य (विशेषकर मंत्री) पर सदन को जानबूझकर गलत जानकारी देकर गुमराह करने का आरोप हो।

  • यदि यह साबित हो जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

वर्तमान स्थिति:

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने फिलहाल इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सत्ता पक्ष का तर्क है कि ये आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों (जैसे अल्पकालिक ऋण, ओवरड्राफ्ट और दीर्घकालिक ऋण) के हो सकते हैं। सदन में गतिरोध जारी रहने की संभावना है।

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