राज्यसभा विदाई सत्र: "सदन से विदा, पर राजनीति में सक्रिय रहेंगे"; रीजीजू का सांसदों को विशेष सुविधा का आश्वासन
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राज्यसभा विदाई सत्र: "सदन से विदा, पर राजनीति में सक्रिय रहेंगे"; रीजीजू का सांसदों को विशेष सुविधा का आश्वासन

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: उच्च सदन से 59 सांसदों की विदाई के अवसर पर सरकार ने एक बड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि पूर्व सांसद बनने के बाद भी इन सदस्यों को संसद आने पर किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

सांसदों के विविध अनुभव और उनकी बातें:

  • किरेन रीजीजू (संसदीय कार्य मंत्री): उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि भारी मन से जाना बुरा नहीं है, यह सदन के प्रति आपके लगाव को दर्शाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदन के नेता जे.पी. नड्डा पारिवारिक शोक के कारण आज उपस्थित नहीं हो सके।

  • रजनी अशोकराव पाटिल (कांग्रेस): उन्होंने 4 अलग-अलग सभापतियों (हामिद अंसारी से लेकर सी.पी. राधाकृष्णन तक) के कार्यकाल को याद करते हुए इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण हिस्सा बताया।

  • रामेश्वर तेली (BJP): उन्होंने 'तीन तलाक' और 'महिला आरक्षण' जैसे ऐतिहासिक विधेयकों के पारित होने का साक्षी बनने को अपना सबसे बड़ा अनुभव बताया।

  • रामभाई मोकरिया और रमिलाबेन बारा (BJP): दोनों सांसदों ने अपनी 100% उपस्थिति का जिक्र किया। मोकरिया ने कहा कि उन्होंने सदन से एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली।

  • साकेत गोखले (TMC): उन्होंने सदन के अनुभवों को अपनी "अमूल्य पूंजी" बताया।

  • रामदास आठवले (केंद्रीय मंत्री): अपने चिर-परिचित अंदाज में उन्होंने कहा कि "थोड़ा हंगामा तो ठीक है, पर ज्यादा नहीं", और देश के विकास के लिए विपक्ष के सहयोग की अपील की।

विदाई का 'नया' विवाद?

सदन में उस समय एक दिलचस्प मोड़ आया जब कांग्रेस के मुख्य सचेतक ने उपसभापति से एक पूर्व सभापति (संकेत जगदीप धनखड़ की ओर, जिन्होंने पिछले साल इस्तीफा दिया था) के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में सवाल पूछा।

आंकड़ों में विदाई:

  • कुल सदस्य: 59

  • अप्रैल में रिटायर: 36

  • जून में रिटायर: 22

  • जुलाई में रिटायर: 01

  • पुन: निर्वाचित: 09 सदस्य वापस लौटेंगे।

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