लोकसभा में 'गिलोटिन' के जरिए बजट मांगों को मंजूरी: वित्त मंत्री ने पेश किया विनियोग विधेयक; बजट प्रक्रिया का दूसरा चरण संपन्न
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लोकसभा में 'गिलोटिन' के जरिए बजट मांगों को मंजूरी: वित्त मंत्री ने पेश किया विनियोग विधेयक; बजट प्रक्रिया का दूसरा चरण संपन्न

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को सदन में आगामी वित्त वर्ष के लिए भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से राशि निकालने और खर्च करने को प्राधिकृत करने वाला विनियोग विधेयक (Appropriation Bill), 2026 पेश किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

क्या है 'गिलोटिन' प्रक्रिया?

संसदीय शब्दावली में 'गिलोटिन' का अर्थ है:

  • समय की पाबंदी: जब बजट सत्र के दौरान विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा के लिए आवंटित समय समाप्त होने वाला होता है, तो अध्यक्ष सभी बकाया मांगों को एक साथ वोटिंग के लिए रख देते हैं।

  • बिना चर्चा के मतदान: इस प्रक्रिया में उन मंत्रालयों की मांगों पर भी मतदान हो जाता है जिन पर सदन में विस्तार से चर्चा नहीं हो पाई हो।

सदन की कार्यवाही के मुख्य बिंदु:

  1. उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण विधायी कार्य के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और गृह मंत्री अमित शाह सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेता सदन में मौजूद थे।

  2. अगला कदम: विनियोग विधेयक पारित होने के साथ ही बजट का एक बड़ा हिस्सा (खर्च करने की शक्ति) सरकार को मिल गया है। अब केवल वित्त विधेयक (Finance Bill) का पारित होना शेष है, जिसमें टैक्स (कर) संबंधी प्रस्ताव होते हैं। इसके बाद बजट प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हो जाएगी।

  3. ध्वनिमत से पारित: हंगामे के बीच या सर्वसम्मति से, अध्यक्ष ने 'हाँ' और 'ना' के आधार पर ध्वनिमत से विनियोग विधेयक को मंजूरी दी।

क्यों जरूरी है विनियोग विधेयक?

संविधान के अनुसार, सरकार संसद द्वारा विनियोग कानून पारित किए बिना भारत की संचित निधि से एक भी रुपया नहीं निकाल सकती। आज की मंजूरी के बाद सरकार के पास 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष में खर्च करने का कानूनी अधिकार आ गया है।

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