भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश: चैत्र शुक्लादि, गुड़ी पड़वा और उगादी की शुभकामनाएं; बताया 'सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक'
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भारतीय नववर्ष की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का संदेश: चैत्र शुक्लादि, गुड़ी पड़वा और उगादी की शुभकामनाएं; बताया 'सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक'

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि ये पर्व केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि नई आशाओं और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का अवसर हैं।

राष्ट्रपति के संदेश की मुख्य बातें:

  • प्रकृति से जुड़ाव: राष्ट्रपति ने कहा कि नव वर्ष के ये उत्सव प्रकृति के साथ हमारे गहरे और प्राचीन संबंधों को दर्शाते हैं।

  • सामाजिक सौहार्द्र: उन्होंने कामना की कि ये त्योहार भारत के विभिन्न समुदायों को प्रेम, स्नेह और भाईचारे के बंधन में और अधिक मजबूती से बांधें।

  • प्रेरणा: ये उत्सव हमें नए संकल्पों के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और खुशियां बांटने की हमारी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा हैं।

एक भारत, अनेक उत्सव:

भारत के अलग-अलग राज्यों में नववर्ष को इन नामों से मनाया जाता है, जिनका राष्ट्रपति ने विशेष उल्लेख किया:

त्योहार का नामप्रमुख क्षेत्र / समुदाय
उगादी (Ugadi)आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक
गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa)महाराष्ट्र और गोवा
चेटी चंद (Cheti Chand)सिंधी समुदाय
चैत्र शुक्लादिउत्तर भारत (नव संवत्सर)
नवरेह (Navreh)कश्मीरी पंडित
साजिबू चेइराओबामणिपुर (मीतेई समुदाय)

शुभकामना संदेश:

"मैं कामना करती हूं कि ये सभी त्योहार सभी के जीवन में खुशहाली, सुख और समृद्धि लेकर आएं।" — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

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