हिमाचल में वित्तीय आपात जैसे हालात: सीएम सुक्खू ने मंत्रियों और अधिकारियों के वेतन में की कटौती; बजट 2026-27 में बड़ी घोषणा
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हिमाचल में वित्तीय आपात जैसे हालात: सीएम सुक्खू ने मंत्रियों और अधिकारियों के वेतन में की कटौती; बजट 2026-27 में बड़ी घोषणा

12, 2, 2026

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शिमला: राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) के बंद होने और बढ़ते कर्ज के बोझ के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य को बचाने के लिए "कठोर सुधार" आवश्यक हैं। यह कटौती अगले छह महीनों के लिए लागू रहेगी।

वेतन कटौती का गणित:

श्रेणीकटौती का प्रतिशत
मुख्यमंत्री50%
उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री30%
विधायक (MLAs)20%
मुख्य सचिव, DGP, ACS और प्रधान सचिव30%
बोर्ड/निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सलाहकार20%

मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण:

बजट पेश करने के बाद मीडिया से बात करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा:

"यह केवल एक अस्थायी उपाय है। जैसे ही राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा, रोकी गई राशि संबंधित व्यक्तियों को वापस कर दी जाएगी। हम प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह त्याग कर रहे हैं।"

संकट के मुख्य कारण:

  1. राजस्व घाटा अनुदान का बंद होना: केंद्र सरकार से मिलने वाली इस आर्थिक मदद के बंद होने से राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ा है।

  2. गंभीर ऋण भार: पिछले कुछ वर्षों में राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ा है, जिससे दैनिक प्रशासनिक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

  3. संसाधनों की कमी: राज्य अब राजस्व बढ़ाने के लिए नए करों और पर्यटन क्षेत्र में बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव:

यह कटौती केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उच्च स्तरीय नौकरशाही (IAS/IPS) और राजनीतिक नियुक्तियों (अध्यक्षों व सलाहकारों) को भी शामिल किया गया है ताकि शासन के हर स्तर पर मितव्ययिता (Frugality) का संदेश जाए।

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