पश्चिम एशिया संकट पर राजनाथ सिंह की चेतावनी: "बातचीत ही एकमात्र रास्ता"; भारत पर ऊर्जा और खाद्य संकट का खतरा
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पश्चिम एशिया संकट पर राजनाथ सिंह की चेतावनी: "बातचीत ही एकमात्र रास्ता"; भारत पर ऊर्जा और खाद्य संकट का खतरा

12, 2, 2026

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हल्द्वानी/घोराखाल: उत्तराखंड की धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने और सैनिक स्कूल घोराखाल की हीरक जयंती के अवसर पर रक्षा मंत्री ने भारत की सुरक्षा रणनीति और वैश्विक चिंताओं को साझा किया।

1. पश्चिम एशिया युद्ध और भारत पर प्रभाव:

  • चिंता का विषय: राजनाथ सिंह ने कहा कि मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका समाधान केवल 'बातचीत और कूटनीति' से ही संभव है।

  • ऊर्जा संकट: हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते हमलों (विशेषकर कतर के रास लाफान एलएनजी केंद्र पर कार्रवाई) ने भारत की चिंता बढ़ा दी है।

    महत्वपूर्ण तथ्य: भारत अपनी एलएनजी (LNG) जरूरतों का लगभग 40% कतर से आयात करता है। यदि यह आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

  • खाद्य सुरक्षा: युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से भविष्य में खाद्य संकट की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

2. आधुनिक युद्ध की नई परिभाषा:

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता। राष्ट्रीय सुरक्षा अब बहुआयामी हो चुकी है, जिसमें शामिल हैं:

  • आर्थिक सुरक्षा

  • डिजिटल सुरक्षा

  • ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा

3. युवाओं और शिक्षा पर जोर (सैनिक स्कूल पहल):

  • 100 नए सैनिक स्कूल: सरकार पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत देशभर में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित कर रही है ताकि युवाओं में अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के मूल्य विकसित किए जा सकें।

  • NCC का विस्तार: एनसीसी (NCC) में रिक्तियों की संख्या बढ़ाई जा रही है ताकि अधिक से अधिक युवा रक्षा क्षेत्र से जुड़ सकें।

  • मानसिक मजबूती: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे तकनीक के साथ-साथ बौद्धिक स्पष्टता और मानसिक दृढ़ता विकसित करें।

4. उत्तराखंड सरकार की सराहना:

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड 'विकास और सुरक्षा' के मॉडल पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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