IIT (ISM) धनबाद में कैलाश सत्यार्थी: "करुणा सहानुभूति नहीं, बल्कि समाज बदलने वाली शक्ति है"; छात्रों से 'बदलाव का वाहक' बनने का आह्वान
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IIT (ISM) धनबाद में कैलाश सत्यार्थी: "करुणा सहानुभूति नहीं, बल्कि समाज बदलने वाली शक्ति है"; छात्रों से 'बदलाव का वाहक' बनने का आह्वान

12, 2, 2026

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धनबाद: शताब्दी व्याख्यान माला के तहत छात्रों को संबोधित करते हुए सत्यार्थी ने स्पष्ट किया कि केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, जब तक उसे मानवीय संवेदनाओं से न जोड़ा जाए।

संबोधन की प्रमुख बातें:

  • करुणा की नई परिभाषा: सत्यार्थी ने कहा कि करुणा (Compassion) केवल सहानुभूति (Sympathy) या समानुभूति (Empathy) नहीं है। यह एक शक्तिशाली और क्रियाशील शक्ति है जो समाज की कुरीतियों को जड़ से मिटाने और सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है।

  • तकनीक और नैतिकता: उन्होंने तकनीकी विकास में नैतिक उत्तरदायित्व (Ethical Responsibility) को समाहित करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, तकनीक तभी सफल है जब वह समावेशी हो और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति के काम आए।

  • बढ़ती उदासीनता के प्रति चेतावनी: आधुनिक समाज में लोगों के बीच बढ़ती संवेदनहीनता और उदासीनता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, शासन, व्यवसाय और न्यायपालिका—सभी क्षेत्रों में करुणा का भाव सर्वोपरि होना चाहिए।

  • छात्रों के लिए संदेश: उन्होंने भावी इंजीनियरों को प्रोत्साहित किया कि वे केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान और करुणा के मेल से 'बदलाव के वाहक' (Agents of Change) बनें।

तीन प्रमुख सूत्र:

सत्यार्थी ने छात्रों से तीन महत्वपूर्ण गुणों को विकसित करने का आग्रह किया:

  1. जागरूकता: अपने आस-पास की समस्याओं के प्रति सजग रहना।

  2. भावनात्मक जुड़ाव: दूसरों के दुःख को महसूस करना।

  3. जवाबदेही: समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझना।

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