इला अरुण का युवाओं को संदेश: "रंगमंच अब केवल कला नहीं, करियर का द्वार भी है"; 21वें META अवार्ड्स में दिखी थियेटर की चमक

इला अरुण का युवाओं को संदेश: "रंगमंच अब केवल कला नहीं, करियर का द्वार भी है"; 21वें META अवार्ड्स में दिखी थियेटर की चमक

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: 'मेटा' के निर्णायक मंडल (Jury) की सदस्य इला अरुण ने 'पीटीआई' से बात करते हुए कहा कि गांवों और छोटे शहरों से युवाओं का थिएटर की ओर मुड़ना इस प्राचीन कला के अस्तित्व के लिए एक शुभ संकेत है।

इला अरुण के वक्तव्य के मुख्य बिंदु:

  • रोजगार के नए अवसर: पहले माना जाता था कि रंगमंच में कोई भविष्य नहीं है, लेकिन अब धारणा बदल गई है। इला के अनुसार, युवाओं को लगता है कि थिएटर के माध्यम से वे OTT प्लेटफॉर्म, फिल्मों और विज्ञापन जगत में अपनी जगह बना सकते हैं।

  • सजीव कला की रक्षा: उन्होंने कहा कि रंगमंच एक 'सजीव प्रदर्शन माध्यम' है। इसे जीवित रखने के लिए जितने अधिक युवा इससे जुड़ेंगे, यह कला उतनी ही समृद्ध होगी।

  • अभिव्यक्ति का माध्यम: करियर के अलावा, युवा अब थिएटर को खुद को अभिव्यक्त करने और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखने के एक सशक्त मंच के रूप में देख रहे हैं।

21वें META अवार्ड्स (2026) का विवरण:

  • महोत्सव की अवधि: 19 मार्च से शुरू होकर 25 मार्च (अवार्ड्स नाइट) तक।

  • स्थान: दिल्ली का प्रतिष्ठित कमानी सभागार और श्री राम प्रदर्शन कला केंद्र

  • प्रतिभागी: 13 श्रेणियों में पुरस्कारों के लिए कुल 10 सर्वश्रेष्ठ नाटकों का चयन किया गया है।

  • विषय: इस साल के नाटकों में पौराणिक कथाएं, भक्ति, राजनीति और सामाजिक बदलाव जैसे विविध विषयों को समेटा गया है।

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