USCIRF की रिपोर्ट पर भारत के पूर्व दिग्गजों का पलटवार: "निहित स्वार्थों से प्रेरित और निराधार"; RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश को बताया 'विकृत'

USCIRF की रिपोर्ट पर भारत के पूर्व दिग्गजों का पलटवार: "निहित स्वार्थों से प्रेरित और निराधार"; RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश को बताया 'विकृत'

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली: 25 पूर्व न्यायाधीशों, 119 पूर्व नौकरशाहों और 131 पूर्व सैन्य अधिकारियों के हस्ताक्षर वाले इस बयान में अमेरिका सरकार से मांग की गई है कि वह इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों की पृष्ठभूमि की जांच करे।

बयान के 5 प्रमुख स्तंभ:

  1. बौद्धिक दिवालियापन का आरोप: हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि RSS जैसे सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन पर प्रतिबंध लगाने और उससे जुड़े लोगों की संपत्ति जब्त करने जैसी सिफारिशें दर्शाती हैं कि रिपोर्ट तैयार करने वालों को भारतीय जमीनी हकीकत की समझ नहीं है।

  2. अमेरिकी करदाताओं के धन का दुरुपयोग: बयान में कहा गया कि अमेरिकी नागरिकों के कर (Tax) के पैसे का उपयोग कुछ "भारत विरोधी समूहों" के गुप्त एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है, जो भारत की साख खराब करना चाहते हैं।

  3. RSS के योगदान की सराहना: पूर्व अधिकारियों ने रेखांकित किया कि 1925 में स्थापित RSS न केवल राष्ट्र निर्माण बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और सामुदायिक सेवा के कार्यों में भारत और विदेशों में अग्रणी रहा है। इसे बिना साक्ष्य के "नकारात्मक" रूप में चित्रित करना गलत है।

  4. लोकतांत्रिक संस्थाओं का हवाला: बयान में जोर दिया गया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ एक मजबूत न्यायपालिका और संसदीय निगरानी प्रणाली मौजूद है। यहाँ किसी के भी धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करके बच निकलना असंभव है।

  5. जनसांख्यिकीय आंकड़ों से पाकिस्तान-बांग्लादेश को आईना: * भारत में अल्पसंख्यकों की संख्या स्थिर है या बढ़ी है।

    • इसके विपरीत, पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 20.5% (1947) से घटकर लगभग 1.5-2% रह गई है।

    • बांग्लादेश में यह 22% (1951) से गिरकर 7-8% पर आ गई है। यह साक्ष्य दर्शाता है कि "व्यवस्थित उत्पीड़न" कहाँ हो रहा है।

प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता:

इस संयुक्त बयान में देश की जानी-मानी हस्तियों ने अपनी आवाज बुलंद की है:

  • पूर्व न्यायाधीश: न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता।

  • पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त: ओ.पी. रावत, सुनील अरोड़ा।

  • पूर्व नौकरशाह/राजनयिक: पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, पूर्व एनआईए निदेशक योगेश चंद्र मोदी।

  • समन्वयक: पूर्व राजदूत भास्वती मुखर्जी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एम. मदन गोपाल।

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