CJI सूर्यकांत का 'बेंगलुरु विजन': "कागजी नहीं, वास्तविक समानता चाहिए"; सरकारी पैनल में 50% महिला वकीलों की वकालत

CJI सूर्यकांत का 'बेंगलुरु विजन': "कागजी नहीं, वास्तविक समानता चाहिए"; सरकारी पैनल में 50% महिला वकीलों की वकालत

12, 2, 2026

0

image

बेंगलुरु: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 में 'न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना' विषय पर बोलते हुए प्रधान न्यायाधीश ने महिला वकीलों के संघर्ष और भविष्य की राह पर अपनी बात रखी।

संबोधन के मुख्य बिंदु और चिंताएं:

  • औपचारिक बनाम वास्तविक समानता: सीजेआई ने कहा कि विधि विद्यालयों (Law Schools) में आज 50% से अधिक छात्राएं हैं, लेकिन वकालत के पेशे में आगे बढ़ते हुए उनकी संख्या कम हो जाती है। उन्होंने इस 'ड्रॉप-आउट' दर पर चिंता जताई।

  • वैज्ञानिक सर्वेक्षण की सराहना: उन्होंने महिला वकीलों द्वारा तैयार किए गए एक सर्वेक्षण को "आंखें खोलने वाला" बताया। यह सर्वेक्षण उन प्रणालीगत बाधाओं की पहचान करता है जो महिलाओं को पेशेवर प्रगति से रोकती हैं।

  • बाधाओं की पहचान: न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कानूनी बिरादरी से उन अड़चनों को दूर करने का आह्वान किया जो महिलाओं को समानता के अधिकार से वंचित करती हैं, ताकि वे करियर के बीच में पेशा छोड़ने पर मजबूर न हों।

सीजेआई द्वारा सुझाए गए ठोस उपाय:

प्रधान न्यायाधीश ने केवल समस्याओं पर बात नहीं की, बल्कि समाधान के लिए स्पष्ट लक्ष्य भी निर्धारित किए:

  1. 50% प्रतिनिधित्व की मांग: उन्होंने कहा कि हमें केवल 30% आरक्षण या प्रतिनिधित्व से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। सरकारी वकीलों के पैनल में कम से कम 50% महिलाएं शामिल होनी चाहिए।

  2. कानूनी सहायता समितियां: विधिक सेवा प्राधिकरणों और सहायता समितियों में भी महिलाओं की बराबर की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

  3. ढांचागत सुधार: अदालतों में महिलाओं के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और संस्थागत समर्थन का आह्वान किया ताकि कार्यस्थल उनके अनुकूल हो सके।

सम्मेलन का विषय:

"न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना: लोकतांत्रिक न्याय के लिए संस्थानों का सुदृढ़ीकरण"

Powered by Froala Editor