छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: अवैध धर्मांतरण पर कड़ा प्रहार; सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: अवैध धर्मांतरण पर कड़ा प्रहार; सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान

12, 2, 2026

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रायपुर: उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में यह विधेयक पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं, बल्कि छल, बल और लोभ से होने वाले 'धोखे' के खिलाफ है।

1. सजा के सख्त और नए प्रावधान:

विधेयक में अपराध की गंभीरता के आधार पर दंड को वर्गीकृत किया गया है:

अपराध का प्रकारप्रस्तावित सजाजुर्माना
सामूहिक धर्मांतरण (2 या अधिक व्यक्ति)10 वर्ष से आजीवन कारावास₹25 लाख तक
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC का अवैध धर्मांतरण10 से 20 वर्ष की कैद₹10 लाख तक
सामान्य उल्लंघन (छल, बल या लोभ)7 से 10 वर्ष की सजा₹5 लाख (न्यूनतम)

2. कानून की मुख्य विशेषताएं:

  • संज्ञेय और गैर-जमानती: इस कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानती होंगे।

  • डिजिटल निगरानी: सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए गए प्रलोभन और धर्मांतरण भी इस कानून के दायरे में आएंगे।

  • घर वापसी: अपने मूल धर्म में वापस लौटने को 'धर्मांतरण' की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

  • विशेष अदालतें: मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन होगा, जो यथासंभव 6 माह में फैसला सुनाएंगी।

  • मुआवजा: पीड़ितों को ₹10 लाख तक का मुआवजा दिलाने का भी प्रावधान है।

3. धर्मांतरण की अनिवार्य प्रक्रिया:

अब इच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए एक पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा:

  1. पूर्व सूचना: व्यक्ति और धार्मिक पदाधिकारी दोनों को जिला मजिस्ट्रेट (DM) को अग्रिम सूचना देनी होगी।

  2. सार्वजनिक प्रदर्शन: सूचना को 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जाएगा।

  3. आपत्ति काल: 30 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज करा सकेगा, जिसकी जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी।


राजनीतिक सरगर्मी: विपक्ष का बहिष्कार और सरकार का पलटवार

  • कांग्रेस का रुख: कांग्रेस सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की थी। मांग खारिज होने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

  • विजय शर्मा का आरोप: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष 'वोट बैंक' की राजनीति के कारण चर्चा से भाग रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1968 का मूल कानून कांग्रेस के समय ही बना था, जिसे अब समय की मांग के अनुसार मजबूत किया गया है।

  • बस्तर का जिक्र: मंत्री ने नारायणपुर और कांकेर में हुए हालिया विवादों का हवाला देते हुए कहा कि बस्तर की संस्कृति की रक्षा के लिए यह कानून अनिवार्य था।


अवैध घुसपैठ पर भी एक्शन:

विधेयक पर चर्चा के दौरान विजय शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि सरकार अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए हर जिले में 'कार्य बल' (Task Force) का गठन कर रही है और उन्हें वापस भेजने के लिए 'होल्डिंग सेंटर' स्थापित किए जा रहे हैं।रायपुर: उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में यह विधेयक पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं, बल्कि छल, बल और लोभ से होने वाले 'धोखे' के खिलाफ है।

1. सजा के सख्त और नए प्रावधान:

विधेयक में अपराध की गंभीरता के आधार पर दंड को वर्गीकृत किया गया है:

अपराध का प्रकारप्रस्तावित सजाजुर्माना
सामूहिक धर्मांतरण (2 या अधिक व्यक्ति)10 वर्ष से आजीवन कारावास₹25 लाख तक
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC का अवैध धर्मांतरण10 से 20 वर्ष की कैद₹10 लाख तक
सामान्य उल्लंघन (छल, बल या लोभ)7 से 10 वर्ष की सजा₹5 लाख (न्यूनतम)

2. कानून की मुख्य विशेषताएं:

  • संज्ञेय और गैर-जमानती: इस कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानती होंगे।

  • डिजिटल निगरानी: सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किए गए प्रलोभन और धर्मांतरण भी इस कानून के दायरे में आएंगे।

  • घर वापसी: अपने मूल धर्म में वापस लौटने को 'धर्मांतरण' की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।

  • विशेष अदालतें: मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन होगा, जो यथासंभव 6 माह में फैसला सुनाएंगी।

  • मुआवजा: पीड़ितों को ₹10 लाख तक का मुआवजा दिलाने का भी प्रावधान है।

3. धर्मांतरण की अनिवार्य प्रक्रिया:

अब इच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए एक पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा:

  1. पूर्व सूचना: व्यक्ति और धार्मिक पदाधिकारी दोनों को जिला मजिस्ट्रेट (DM) को अग्रिम सूचना देनी होगी।

  2. सार्वजनिक प्रदर्शन: सूचना को 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जाएगा।

  3. आपत्ति काल: 30 दिनों के भीतर कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज करा सकेगा, जिसकी जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी।


राजनीतिक सरगर्मी: विपक्ष का बहिष्कार और सरकार का पलटवार

  • कांग्रेस का रुख: कांग्रेस सदस्यों ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की थी। मांग खारिज होने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

  • विजय शर्मा का आरोप: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष 'वोट बैंक' की राजनीति के कारण चर्चा से भाग रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1968 का मूल कानून कांग्रेस के समय ही बना था, जिसे अब समय की मांग के अनुसार मजबूत किया गया है।

  • बस्तर का जिक्र: मंत्री ने नारायणपुर और कांकेर में हुए हालिया विवादों का हवाला देते हुए कहा कि बस्तर की संस्कृति की रक्षा के लिए यह कानून अनिवार्य था।


अवैध घुसपैठ पर भी एक्शन:

विधेयक पर चर्चा के दौरान विजय शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि सरकार अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए हर जिले में 'कार्य बल' (Task Force) का गठन कर रही है और उन्हें वापस भेजने के लिए 'होल्डिंग सेंटर' स्थापित किए जा रहे हैं।

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