छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: अवैध धर्मांतरण पर प्रहार; 'सामूहिक धर्मांतरण' पर अब आजीवन कारावास
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026: अवैध धर्मांतरण पर प्रहार; 'सामूहिक धर्मांतरण' पर अब आजीवन कारावास

12, 2, 2026

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रायपुर: उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किए गए इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया गया। सरकार का तर्क है कि तकनीक के विस्तार और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के कारण पुराने कानून (1968) में संशोधन अनिवार्य था।

1. सजा और जुर्माने के सख्त प्रावधान:

विधेयक में अपराध की प्रकृति के आधार पर सजा को अत्यंत कठोर बनाया गया है:

अपराध की श्रेणीप्रस्तावित सजान्यूनतम जुर्माना
सामूहिक धर्मांतरण (2 या अधिक व्यक्ति)10 वर्ष से आजीवन कारावास₹25 लाख
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC का धर्मांतरण10 से 20 वर्ष की कैद₹10 लाख
सामान्य उल्लंघन (बल, प्रलोभन या कपट)7 से 10 वर्ष की सजा₹5 लाख

2. कानून की प्रमुख विशेषताएं:

  • गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।

  • डिजिटल दायरा: सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम या किसी भी तकनीकी प्रलोभन के जरिए किया गया धर्मांतरण भी इस कानून के दायरे में आएगा।

  • घर वापसी: अपने मूल धर्म (Previous Religion) में वापस लौटने को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

  • त्वरित न्याय: मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित होंगी, जो 6 माह के भीतर फैसले का प्रयास करेंगी।

  • पीड़ित मुआवजा: अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों को ₹10 लाख तक का मुआवजा देने का प्रावधान है।

3. धर्मांतरण के लिए नई अनिवार्य प्रक्रिया:

अब स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए भी एक पारदर्शी सरकारी प्रक्रिया से गुजरना होगा:

  1. अग्रिम सूचना: धर्मांतरण के इच्छुक व्यक्ति और संबंधित धार्मिक पदाधिकारी को जिला मजिस्ट्रेट (DM) को पूर्व सूचना देनी होगी।

  2. सार्वजनिक विवरण: प्रस्तावित धर्मांतरण का विवरण 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जाएगा।

  3. आपत्ति अवधि: 30 दिनों तक सार्वजनिक आपत्तियां ली जाएंगी, जिसकी गहन जांच के बाद ही प्रशासन अंतिम आदेश जारी करेगा।


प्रलोभन और प्रताड़ना की नई परिभाषा:

विधेयक में इन शब्दों को बहुत विस्तार से परिभाषित किया गया है ताकि कोई कानूनी खामी न रहे:

  • प्रलोभन: नकद धन, उपहार, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवनशैली का वादा, रोजगार या विवाह का लालच।

  • प्रताड़ना: केवल शारीरिक बल ही नहीं, बल्कि मानसिक दबाव या किसी भी प्रकार की धमकी देना।

राजनीतिक घटनाक्रम:

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस विधेयक को प्रवर समिति (Select Committee) को भेजने की मांग की थी। मांग खारिज होने पर कांग्रेस सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और चर्चा में भाग नहीं लिया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष 'वोट बैंक' की राजनीति के कारण चर्चा से भाग रहा है।

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