छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026: मुख्य प्रावधान और कड़े नियम
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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026: मुख्य प्रावधान और कड़े नियम

12, 2, 2026

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गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में बिल की बारीकियों को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह कानून आस्था की स्वतंत्रता और पारदर्शिता पर आधारित है:

  • धर्मांतरण कराने वालों पर नकेल: सजा का प्रावधान केवल धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं पर होगा। अपनी मर्जी से धर्म बदलने वाले व्यक्ति को दंडित नहीं किया जाएगा।

  • अनिवार्य पंजीकरण और नोटिस: धर्मांतरण से पहले जिला कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा। कलेक्टर संबंधित व्यक्ति के गांव, ब्लॉक और जिले में 30 दिनों का सार्वजनिक नोटिस चस्पा करेंगे।

  • आपत्ति प्रक्रिया: यदि 30 दिनों के भीतर कोई वैध आपत्ति नहीं आती है, तभी धर्मांतरण का प्रमाणपत्र जारी होगा और इसका सरकारी रिकॉर्ड रखा जाएगा।

  • विवाह और धर्मांतरण: विधेयक स्पष्ट करता है कि विवाह के आधार पर स्वतः (Automatic) धर्मांतरण मान्य नहीं होगा। शादी के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

  • आजीवन कारावास: यदि कोई व्यक्ति दोबारा धर्मांतरण कराने का दोषी पाया जाता है (Habitual Offender), तो उसके लिए आजीवन कारावास तक की कठोर सजा का प्रावधान है।

  • सालाना रिपोर्ट: धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं/व्यक्तियों को अपनी गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी।


सदन में 'सियासी संग्राम': विपक्ष का वॉकआउट और सत्ता पक्ष का तंज

विधेयक के पेश होते ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई:

विपक्ष (कांग्रेस) की मांग:

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि देश के 11 राज्यों में ऐसे बिल लंबित हैं, इसलिए इस पर जल्दबाजी में चर्चा नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि इस संवेदनशील बिल को पहले विधानसभा की 'प्रवर समिति' (Select Committee) को सौंपा जाए।

स्पीकर का फैसला और बहिष्कार:

विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए गृहमंत्री को विधेयक प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी। इससे नाराज होकर पूरी कांग्रेस पार्टी ने दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।

सत्ता पक्ष का प्रहार:

कांग्रेस विधायकों के सदन से बाहर जाने पर सत्ता पक्ष ने "शेम-शेम" के नारे लगाए। भाजपा विधायकों ने इसे 'पलायन' करार देते हुए कहा कि विपक्ष को आदिवासी समाज की पीड़ा और धर्मांतरण के गंभीर मुद्दे से कोई सरोकार नहीं है।

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