विश्व जल दिवस 2026: 'जल संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा'
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विश्व जल दिवस 2026: 'जल संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा'

12, 2, 2026

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आज की वैश्विक परिस्थितियों में जल संकट एक 'अलार्म' की तरह है। पृथ्वी पर जल की उपलब्धता और मानव उपभोग के बीच का असंतुलन समझने के लिए नीचे दी गई तालिका सहायक होगी:

1. पृथ्वी पर जल का वितरण: एक नज़र में

जल का प्रकारकुल प्रतिशतउपयोगिता
खारा जल (समुद्री)97%सीधे उपभोग के अयोग्य
मीठा जल (Freshwater)3%इसमें से अधिकांश ग्लेशियरों/बर्फ में जमा है
सुलभ मीठा जल< 1%नदियों, झीलों और भूजल के रूप में उपलब्ध

2. भारत में जल संकट की स्थिति

भारत की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति इसे जल के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है:

  • जनसंख्या: विश्व की 18% आबादी।

  • जल संसाधन: विश्व के मीठे जल का केवल 4% हिस्सा।

  • चुनौती: अनियंत्रित भूजल दोहन और तेजी से गिरता वाटर टेबल (Water Table)।


भारत सरकार की प्रमुख पहल और मिशन

लेख में वर्णित योजनाएं जल प्रबंधन के 'त्रि-आयामी' (संरक्षण, प्रबंधन और आपूर्ति) दृष्टिकोण को दर्शाती हैं:

  • जल जीवन मिशन: वर्ष 2024-25 तक ग्रामीण भारत के हर घर में 'नल से जल' (FHTC) सुनिश्चित करना।

  • अटल भूजल योजना: सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से गिरते भूजल स्तर को रोकना।

  • कैच द रेन (Catch the Rain): मानसून के दौरान वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को एक जन-आंदोलन बनाना।

  • नमामि गंगे: पवित्र नदियों की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखना।

  • Shutterstock

समाधान: व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी

जल संरक्षण केवल नीतियों से नहीं, बल्कि 'व्यवहार परिवर्तन' से संभव है। हम अपनी जीवनशैली में ये छोटे बदलाव ला सकते हैं:

  1. कृषि में सुधार: पारंपरिक सिंचाई की जगह ड्रिप (Drip) और स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिंचाई अपनाना।

  2. घरेलू बचत: ब्रश करते समय नल बंद रखना, नलों की लीकेज ठीक करना और 'RO' से निकलने वाले वेस्ट पानी का पौधों में उपयोग करना।

  3. वर्षा जल संचयन: छतों पर गिरने वाले बारिश के पानी को टैंकों या भूजल पुनर्भरण (Recharge) के लिए निर्देशित करना।

  4. युवा भागीदारी: शिक्षण संस्थानों में जल साक्षरता (Water Literacy) को बढ़ावा देना।


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