रायपुर मेकाहारा की बदहाली: आंबेडकर अस्पताल में शौचालयों पर लटके ताले, गंदगी और बदबू के बीच मरीज बेहाल
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रायपुर मेकाहारा की बदहाली: आंबेडकर अस्पताल में शौचालयों पर लटके ताले, गंदगी और बदबू के बीच मरीज बेहाल

12, 2, 2026

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प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब मरीजों के लिए किसी सजा से कम नहीं रह गया है। राजधानी रायपुर के इस प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी (OPD) ब्लॉक के पास स्थित 12 से अधिक शौचालयों में से अधिकांश पर ताले लटके हुए हैं। रोज़ाना हज़ारों की संख्या में प्रदेशभर से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह स्थिति एक गंभीर मानवीय और स्वास्थ्य संकट पैदा कर रही है।

साफ-सफाई का बुरा हाल: जो इक्का-दुक्का शौचालय खुले भी हैं, उनकी स्थिति नारकीय बनी हुई है। चारों ओर फैली गंदगी, टूटे पाइप और असहनीय बदबू के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। अस्पताल आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को सुलभ प्रसाधन की कमी के कारण भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन और स्वच्छता विंग की नाक के नीचे यह अव्यवस्था महीनों से जारी है।

मरीजों की गुहार: दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आए परिजनों का कहना है कि वे घंटों तक लाइन में लगकर डॉक्टर का इंतज़ार करते हैं, लेकिन बुनियादी ज़रूरत (शौचालय) के लिए उन्हें अस्पताल परिसर से बाहर या अन्य वार्डों में भटकना पड़ता है। प्रशासन के "स्वच्छ भारत" और "कायाकल्प" जैसे दावों के बीच मेकाहारा की यह तस्वीर सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर रही है।

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